एक दिन में 7 घायल गायों का रेस्क्यू, युवाओं ने पेश की मानवता की मिसाल

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एक दिन में 7 घायल गायों का रेस्क्यू, युवाओं ने पेश की मानवता की मिसाल

अनूपपुर। घायल और बेसहारा गौवंश की मदद के लिए युवाओं की टीम ने एक बार फिर संवेदनशीलता और मानवता की मिसाल पेश की। जनपद पंचायत जैतहरी अंतर्गत ग्राम पंचायत देवरी के रेस्क्यू कॉलोनी निवासी समाजसेवी एवं राष्ट्रीय बजरंग दल के जिला मंत्री सैम राजपूत के नेतृत्व में युवाओं ने एक ही दिन में अलग-अलग स्थानों से 7 घायल गायों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह सैम राजपूत को सूचना मिली कि चचाई बस्ती स्थित पेट्रोल टंकी के सामने दो गायें गंभीर हालत में पड़ी हुई हैं। सूचना मिलते ही सैम राजपूत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों गायों के रेस्क्यू की कार्रवाई शुरू की। इसके बाद टीम को लगातार अलग-अलग स्थानों से घायल और बेसहारा गायों के संबंध में सूचनाएं मिलती रहीं।

युवाओं ने बिना समय गंवाए पूरे दिन रेस्क्यू अभियान जारी रखा। टीम ने पेट्रोल टंकी के सामने से दो गायों, सोडा फैक्ट्री के पास से एक गाय, ईंट-भट्ठा स्थित शासकीय स्कूल के सामने से एक गाय तथा चचाई बस्ती से दो गायों का सुरक्षित रेस्क्यू किया। इस प्रकार देर रात करीब 11 बजे तक चले अभियान में कुल 7 घायल गायों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचती है टीम

रेस्क्यू अभियान में सैम राजपूत के साथ नवल साहू, गोलू राय, अश्वनी, सुजैन और छोटू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम के सदस्यों ने बताया कि सड़क, बस्ती या अन्य स्थानों पर घायल अथवा बेसहारा गौवंश की जानकारी मिलने पर वे अपनी क्षमता के अनुसार तत्काल मौके पर पहुंचने का प्रयास करते हैं। गंभीर हालत में मिली गायों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्था भी युवाओं द्वारा की जाती है।

खर्च भी युवाओं ने स्वयं उठाया

रेस्क्यू टीम के अनुसार एक दिन में 7 गायों के रेस्क्यू अभियान के दौरान दिन में हुए खर्च का भुगतान टीम के सदस्यों ने स्वयं किया। वहीं रात के समय रेस्क्यू कार्य में होने वाले खर्च में चीनी भैया ने सहयोग प्रदान किया। युवाओं का कहना है कि गौवंश की सेवा उनके लिए केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का भी हिस्सा है।

घायल गौवंश की सेवा को बताया सामाजिक दायित्व

सैम राजपूत और उनकी टीम का कहना है कि सड़क दुर्घटना, बीमारी या किसी अन्य कारण से घायल होकर बेसहारा अवस्था में पड़े गौवंश को समय पर सहायता मिलना जरूरी है। कई बार घायल पशु घंटों तक सड़क किनारे पड़े रहते हैं, जिससे उनकी स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे में सूचना मिलते ही उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

युवाओं ने कहा कि जरूरत पड़ने पर भविष्य में भी इसी तरह रेस्क्यू अभियान जारी रखा जाएगा। उनका उद्देश्य घायल और बेसहारा गौवंश को समय पर सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी जान बचाई जा सके और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके।

स्थानीय लोगों ने की सराहना

एक ही दिन में 7 घायल गायों के रेस्क्यू की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने युवाओं की पहल की सराहना की। लोगों का कहना है कि आज के समय में जहां लोग घायल पशुओं को देखकर भी आगे निकल जाते हैं, वहीं इन युवाओं द्वारा अपना समय और संसाधन लगाकर लगातार गौवंश की सहायता करना समाज के लिए सकारात्मक संदेश है।

स्थानीय नागरिकों ने कहा कि ऐसे प्रयासों से समाज में सेवा, संवेदना और जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है। युवाओं की यह पहल न केवल घायल गौवंश के लिए मददगार साबित हुई, बल्कि अन्य लोगों को भी जरूरतमंद पशुओं की सहायता के लिए आगे आने की प्रेरणा देती है।

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