रेलवे की बदहाली पर यात्रियों का फूटा गुस्सा 32 किमी के सफर में ₹35 किराया, ट्रेनें घंटों लेट, कोतमा स्टेशन का शौचालय निर्माण के बाद से ही बंद
बिलासपुर रेल जोन के अनूपपुर चिरमिरी अंबिकापुर रेल मार्ग पर अव्यवस्था का आरोप, यात्री बोले रेल सेवा के नाम पर आखिर कब तक मजाक?
कोतमा। बिलासपुर रेल जोन के अंतर्गत आने वाले अनूपपुर जंक्शन चिरमिरी अंबिकापुर रेल मार्ग पर यात्रियों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। ट्रेनें तीन तीन, चार-चार घंटे देरी से चल रही हैं और दूसरी ओर रेलवे स्टेशनों पर मूलभूत यात्री सुविधाओं का बुरा हाल है। हालात ऐसे हैं कि कोतमा स्टेशन पर बनाया गया शौचालय जब से बना है, तब से आज तक उसका ताला ही नहीं खुला
यात्रियों का कहना है कि रेलवे किराया लगातार लिया जा रहा है, लेकिन बदले में सुविधाएं देने के नाम पर यात्रियों को इंतजार, अव्यवस्था और परेशानी ही मिल रही है। अंबिकापुर शहडोल एक्सप्रेस में कोतमा से अनूपपुर जंक्शन की लगभग 32 किलोमीटर की दूरी का किराया ₹35 है, लेकिन समय की पाबंदी और यात्री सुविधाओं की स्थिति देखकर सवाल उठता है कि आखिर यात्रियों को मिल क्या रहा है?
ट्रेन का इंतजार या मालगाड़ी की गिनती?
यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत ट्रेनों की लेटलतीफी को लेकर है। तीन से चार घंटे तक ट्रेनें विलंब से चलने के कारण यात्रियों का पूरा कार्यक्रम बिगड़ जाता है। यात्रियों में यह नाराजगी भी है कि यात्री ट्रेनें समय पर नहीं चलतीं और उन्हें घंटों स्टेशन पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है।
यात्री कहते हैं कि यात्री ट्रेन का इंतजार करने के बजाय स्टेशन पर निकलती मालगाड़ियों की गिनती करते रहते हैं यही व्यवस्था रह गई है
बनाया शौचालय, लेकिन यात्रियों के लिए ताला!
कोतमा स्टेशन की सबसे गंभीर समस्या शौचालय को लेकर सामने आ रही है। यात्रियों के अनुसार, शौचालय बनने के बाद से ही उसका ताला नहीं खोला गया। यानी सुविधा के नाम पर निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन यात्रियों को उसका इस्तेमाल करने का अधिकार तक नहीं मिला।
सवाल यह है कि जब शौचालय यात्रियों के लिए बनाया गया था तो उसे बंद रखने का औचित्य क्या है? क्या रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी यह जांचने की जरूरत समझी कि यात्री इस सुविधा का इस्तेमाल कर भी पा रहे हैं ?
स्टेशन परिसर में शराबी और भिखारियों का जमावड़ा!
यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्र में भिखारियों के साथ साथ शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बना रहता है। इनमें महिला, पुरुष और बच्चे भी शामिल हैं। यात्रियों के मुताबिक, गाली गलौज और मारपीट की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल जीआरपी और आरपीएफ की मौजूदगी तथा निगरानी व्यवस्था पर उठता है। यात्रियों का कहना है कि जब स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होती है, तब जिम्मेदार सुरक्षा बल दिखाई नहीं देते।
न पानी की भरोसेमंद व्यवस्था, न साफ सफाई
स्टेशन पर साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था को लेकर भी यात्रियों में भारी नाराजगी है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगह पर स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय और नियमित सफाई जैसी सुविधाएं कोई विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत हैं।
लेकिन कोतमा सहित संबंधित मार्ग के स्टेशनों की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि यात्रियों से किराया लेने में रेलवे आगे है और सुविधाएं देने में पीछे
जिम्मेदार अधिकारियों पर उठ रहे सवाल
यह स्थिति केवल रेलवे की व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि बिलासपुर रेल जोन के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। आखिर शौचालय वर्षों से बंद है तो निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ी? स्टेशन परिसर में असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें हैं स्टेशन परिसर में भिखारियों का कब्जा बना हुआ रहता है तो सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं सुधारी गई? ट्रेनें लगातार घंटों लेट हैं तो यात्रियों की परेशानी का स्थायी समाधान कब होगा?
सरकार रेलवे के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में यदि यात्रियों को शौचालय तक नसीब न हो और ट्रेन के लिए घंटों इंतजार करना पड़े, तो इन दावों पर सवाल उठना लाजिमी है।




































