अमरकंटक में लगे सांकेतिक साइन बोर्डों पर हिंदी की अशुद्धियां ,

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अमरकंटक में लगे सांकेतिक साइन बोर्डों पर हिंदी की अशुद्धियां ,

साधु संतों और नागरिकों ने की प्रशासन से सुधार की मांग

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए कई सांकेतिक साइन बोर्डों पर हिंदी भाषा की अशुद्धियां दिखाई दे रही हैं । नगर के विभिन्न स्थानों पर लगे बोर्डों में “प्रशाद” तथा “विकाश” जैसे शब्द लिखे गए हैं जबकि इनके सही रूप क्रमशः “प्रसाद” और “विकास” हैं ।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अमरकंटक में प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंचते हैं । ऐसे में मार्गदर्शन और सूचना के लिए लगाए गए साइन बोर्डों पर भाषा की शुद्धता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है । सार्वजनिक स्थानों पर गलत शब्दों का प्रयोग न केवल हिंदी भाषा की गरिमा को प्रभावित करता है बल्कि आगंतुकों के समक्ष भी गलत संदेश प्रस्तुत करता है ।

नगरवासियों के अनुसार ये सांकेतिक बोर्ड लंबे समय से लगे हुए हैं , किंतु अब तक इन त्रुटियों को सुधारने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है । नागरिकों , साधु-संतों एवं समाज के प्रबुद्धजनों ने मांग की है कि जिन एजेंसियों , विभागों अथवा ठेकेदारों द्वारा इन बोर्डों का निर्माण एवं स्थापना की गई है उनकी जवाबदेही तय की जाए और सभी अशुद्ध शब्दों को तत्काल संशोधित कराया जाए ।

अमरकंटक के साधु संतों और प्रबुद्धजनों का कहना है कि अमरकंटक जैसी धार्मिक , सांस्कृतिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण नगरी की पहचान उसके सौंदर्य , स्वच्छता और भाषा की शुद्धता से भी जुड़ी हुई है । इसलिए सभी सार्वजनिक साइन बोर्डों पर मानक एवं शुद्ध हिंदी का प्रयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए ।
नगर परिषद एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस विषय को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करें , ताकि पवित्र नगरी की गरिमा और प्रतिष्ठा अक्षुण्ण बनी रहे ।

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