आखिर कब मुक्त होंगे पातालेश्वर महादेव? कोर्ट के आदेश के बाद भी अमरकंटक का रंगमहल मंदिर पूजा-अर्चना से वंचित
भगवा पार्टी ने उठाई आवाज, कहा आस्था के केंद्र को पुरातत्व विभाग के नियंत्रण से मुक्त कर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए; कोर्ट के आदेश के पालन की मांग तेज
अमरकंटक/अनूपपुर।
मां नर्मदा की पावन नगरी अमरकंटक स्थित प्राचीन कलचुरीकालीन रंगमहल मंदिर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर में विराजमान पातालेश्वर महादेव, भगवान विष्णु, सत्यनारायण एवं अन्य देवस्थानों में नियमित पूजा-अर्चना शुरू न होने को लेकर धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं में असंतोष व्याप्त है। भगवा पार्टी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए मांग की है कि न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा श्रद्धालुओं को निर्बाध दर्शन और पूजा का अधिकार मिले।
भगवा पार्टी के जिला अध्यक्ष कन्हैयालाल मिश्र ने कहा कि रंगमहल मंदिर निजी धार्मिक संपत्ति है तथा यहां पूजा-अर्चना का अधिकार न्यायालय द्वारा भी मान्य किया जा चुका है। इसके बावजूद मंदिर का बड़ा हिस्सा आज भी प्रभावी रूप से आम श्रद्धालुओं के लिए सुलभ नहीं हो पाया है। उन्होंने मांग की कि मंदिर को पुरातत्व विभाग के नियंत्रण से मुक्त कर धार्मिक परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना की व्यवस्था बहाल की जाए।
गौरतलब है कि मां नर्मदा मंदिर के सामने स्थित यह प्राचीन रंगमहल मंदिर लंबे समय तक पूजा-अर्चना से वंचित रहा। इस विषय को लेकर ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने रंगमहल मंदिर में पूजा-अर्चना के अधिकार को लेकर न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ी थी। इस प्रकरण में उनकी ओर से अधिवक्ता मुरलीधर शर्मा एवं श्रीधर शर्मा ने प्रभावी पैरवी की थी। न्यायालय में दोनों अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत तर्कों के आधार पर द्वारका शारदा पीठ के पक्ष में निर्णय आया, जिसमें मंदिर की देखरेख एवं विधि-विधान से पूजा-अर्चना का अधिकार पीठ को प्रदान किया गया। इसके बावजूद स्थानीय श्रद्धालुओं का आरोप है कि न्यायालय के आदेश का पूर्ण रूप से पालन अब तक नहीं हो पाया है, जिससे धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों में निराशा और असंतोष बना हुआ है। कानूनी लड़ाई लड़ी थी। उनके पक्ष में आए निर्णय के बाद मंदिर में विधि-विधान से पूजा प्रारंभ होने की उम्मीद जगी थी। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्णय की भावना के अनुरूप व्यवस्था आज तक पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रंगमहल परिसर स्थित पातालेश्वर महादेव का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्रावण मास में यहां दिव्य आध्यात्मिक महत्व से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान और परंपराएं जुड़ी रही हैं। ऐसे में वर्षों से पूजा-अर्चना प्रभावित रहने को लेकर क्षेत्र के लोगों में निराशा है।
वर्तमान में मंदिर परिसर में बद्री विशाल भगवान की पूजा एक साध्वी द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि पातालेश्वर महादेव, विष्णु मंदिर, हनुमान मंदिर सहित अन्य प्राचीन देवस्थानों में नियमित पूजा व्यवस्था शुरू कराने की मांग लगातार उठ रही है।
भगवा पार्टी ने राज्य एवं जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि न्यायालय के आदेश की समीक्षा कर उसके प्रभावी पालन की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि सनातन आस्था के इस महत्वपूर्ण केंद्र पर श्रद्धालुओं को धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना का अवसर मिल सके।
















