ओआरएस है निर्जलीकरण से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय: प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल
आईजीएनटीयू के नर्सिंग विभाग ने ओआरएस दिवस पर मॉडल ट्राइबल स्कूल में चलाया स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, विद्यार्थियों को सिखाई सही उपयोग की विधि
अमरकंटक। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) के नर्सिंग विभाग द्वारा ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) दिवस के अवसर पर मॉडल ट्राइबल स्कूल में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “ओआरएस: स्वस्थ बच्चे, स्वस्थ भविष्य” थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को दस्त के दौरान होने वाले निर्जलीकरण से बचाव तथा ओआरएस के सही उपयोग के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल रहे। कार्यक्रम का संचालन सुश्री अचुन आर. ने किया। प्रारंभ में डॉ. मालती लोधी ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दस्त के दौरान समय पर ओआरएस का उपयोग बच्चों के जीवन की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और प्रत्येक परिवार को इसके सही उपयोग की जानकारी होना आवश्यक है।
मुख्य वक्ता डॉ. दीप्ति ने विद्यार्थियों को दस्त के कारण होने वाले निर्जलीकरण के लक्षण, उससे बचाव के उपाय तथा ओआरएस की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी को पूरा करने के लिए ओआरएस सबसे सरल, सुरक्षित और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों के सामने ओआरएस घोल तैयार करने की सही विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया तथा इसकी मात्रा और उपयोग के संबंध में आवश्यक जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तरी एवं संवाद सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बच्चों ने स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्राथमिक उपचार से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल और वैज्ञानिक तरीके से उत्तर दिया। इस दौरान विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल, व्यक्तिगत स्वच्छता और समय पर उपचार के महत्व से भी अवगत कराया गया।
समापन अवसर पर विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को ओआरएस के पैकेट वितरित किए गए तथा उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, स्वच्छता बनाए रखने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल उपचार लेने का संदेश दिया गया।
नर्सिंग विभाग ने बताया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी विकसित करना, रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की समझ विकसित करना है। कार्यक्रम के अंत में संदेश दिया गया कि “स्वस्थ बच्चे, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए ओआरएस का सही उपयोग और स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी प्रत्येक परिवार तक पहुँचना आवश्यक है।”
















