वैज्ञानिक खदान बंदी, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन एवं सतत विकास पर केंद्रित राष्ट्रीय कार्यक्रम में ‘आरोह’ वार्षिक माइन क्लोजर रिपोर्ट का विमोचन

---Advertisement---

वैज्ञानिक खदान बंदी पर कोयला मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘आरोह (AAROH) – एनुअल रिपोर्ट ऑन माइन क्लोजर’ के दौरान माननीय केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज ‘आरोह – वार्षिक माइन क्लोजर रिपोर्ट’ का विमोचन किया। यह रिपोर्ट देश में वैज्ञानिक माइन क्लोजर की दिशा में हुई प्रगति, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, सतत खननोत्तर भूमि उपयोग तथा समुदाय-केंद्रित विकास पहलों का व्यापक दस्तावेज है।

इस अवसर पर माननीय केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे तथा माननीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान विभाग के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की गरिमामियी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त, अपर सचिव श्री सनोज कुमार झा, अपर सचिव श्रीमती रूपिंदर बरार, कोयला नियंत्रक श्री सजीश कुमार एन. सहित मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

समारोह में चेयरमैन कोल इंडिया श्री बी.साईंराम, सीएमडी बीसीसीएल श्री मनोज कुमार अग्रवाल सहित कोल इंडिया की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों के सीएमडी एवं निदेशकगण, विभिन्न संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारी, विशेषज्ञ एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। बीसीसीएल के निदेशक (तकनीकी) श्री संजय कुमार सिंह, निदेशक (तकनीकी/परियोजना एवं योजना) श्री राजीव कुमार सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान ‘आरोह – वार्षिक माइन क्लोजर रिपोर्ट’ का औपचारिक विमोचन किया गया। रिपोर्ट में अनुमोदित माइन क्लोजर योजनाओं के अनुरूप स्वतंत्रता के बाद पहली बार वैज्ञानिक रूप से बंद की गई 42 कोयला खदानों की परिवर्तनकारी यात्रा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। इसमें दर्शाया गया है कि किस प्रकार वैज्ञानिक पुनर्वास, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, सतत खननोत्तर भूमि उपयोग तथा समुदाय-केंद्रित हस्तक्षेपों के माध्यम से बंद खदान क्षेत्रों का उत्पादक एवं जनोपयोगी पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

अपने संबोधन में माननीय केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि माइन क्लोजर केवल वैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि खनन चक्र का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें पर्यावरणीय पुनर्स्थापन, भूमि पुनर्वास तथा खननोत्तर क्षेत्रों के उत्पादक एवं जनहितकारी उपयोग को सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा खनन प्रभावित समुदायों के समग्र एवं सतत विकास के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कोयला मंत्रालय ने वैज्ञानिक माइन क्लोजर एवं सतत खननोत्तर विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से RECLAIM Framework के माध्यम से सामुदायिक सहभागिता, L.I.V.E.S. Framework के माध्यम से सतत माइन क्लोजर एवं पुनः उपयोग तथा SUVIKALP नामक इंटरैक्टिव निर्णय सहयोग प्रणाली के माध्यम से खदानों के उपयुक्त पुनः उपयोग के विकल्पों के वैज्ञानिक मूल्यांकन हेतु महत्वपूर्ण संस्थागत एवं तकनीकी ढाँचे विकसित किए हैं। इन पहलों से वैज्ञानिक माइन क्लोजर, हितधारकों की सक्रिय सहभागिता तथा दीर्घकालिक भूमि उपयोग योजना को नई दिशा मिली है।

माननीय मंत्री ने कहा कि ‘आरोह’ रिपोर्ट वैज्ञानिक माइन क्लोजर के क्षेत्र में देश की उपलब्धियों का दस्तावेज होने के साथ-साथ भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक भी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे पर्यावरणीय पुनर्स्थापन, आर्थिक विविधीकरण तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों के दीर्घकालिक एवं समावेशी विकास को नई गति मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान कोयला मंत्रालय द्वारा वैज्ञानिक माइन क्लोजर, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन तथा समुदाय-केंद्रित पुनर्वास से संबंधित विभिन्न नवाचारों एवं पहलों पर आधारित प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। प्रदर्शनी में कोल इंडिया लिमिटेड एवं उसकी सहायक कंपनियों तथा निजी खनन कंपनियों द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों को प्रदर्शित किया गया। तकनीकी सत्र में विषय-विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक खदान बंदी पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के समापन पर कोयला मंत्रालय ने वैज्ञानिक माइन क्लोजर की प्रक्रिया में सतत विकास, नवाचार एवं समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण को निरंतर बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रालय ने कहा कि सुव्यवस्थित नीतिगत ढाँचों, आधुनिक डिजिटल उपकरणों तथा संस्थागत एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से माइन क्लोजर को पर्यावरणीय पुनर्स्थापन, आर्थिक विविधीकरण एवं दीर्घकालिक क्षेत्रीय विकास के प्रभावी अवसर में परिवर्तित किया जा रहा है। इस दृष्टि से ‘आरोह – वार्षिक माइन क्लोजर रिपोर्ट’ नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, शोध संस्थानों तथा अन्य हितधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज सिद्ध होगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

July 23, 2026

July 23, 2026

July 23, 2026

July 23, 2026

July 23, 2026

July 23, 2026

Leave a Comment