बरसात में पैदल चलना मुश्किल, दोपहिया वाहन चालक रोज हो रहे परेशान; ग्रामीण बोले— विकास के दावों के बीच सड़क बनी सबसे बड़ी समस्या
जमुना कोतमा। जिले के ग्रामीण क्षेत्र दुर्वासिन और आसपास के गांवों की सड़कें इन दिनों लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क पूरी तरह कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। हालत यह है कि यदि कोई व्यक्ति दोपहिया वाहन लेकर इस मार्ग से निकलने की कोशिश करता है तो उसके फिसलकर गिरने या कीचड़ में फंसने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग अब सड़क कम और दलदल अधिक नजर आता है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इसी क्षेत्र के समीप प्रदेश सरकार में कई बार मंत्री रहे और वर्तमान विधायक बिसाहूलाल सिंह का निवास भी है। इसके बावजूद सड़क की ऐसी दुर्दशा स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब जनप्रतिनिधि के गृह क्षेत्र की सड़क का यह हाल है, तो दूरदराज के गांवों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार बारिश शुरू होते ही इस मार्ग पर आवागमन लगभग दुश्वार हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, किसानों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार वाहन चालक कीचड़ में फंस जाते हैं, जबकि पैदल चलने वालों को भी गिरकर चोट लगने का खतरा बना रहता है। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या अन्य जरूरी वाहन भी समय पर पहुंच पाएंगे या नहीं, इसे लेकर ग्रामीण चिंतित हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली की शिकायत कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। बरसात के हर मौसम में यही स्थिति बनती है और कुछ समय बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग तथा जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि दुर्वासिन क्षेत्र की इस जर्जर सड़क का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि सड़क केवल विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आम जनजीवन की जीवनरेखा है।
तस्वीर में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि सड़क पूरी तरह कीचड़ से पट चुकी है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन ग्रामीणों की इस पीड़ा को कब गंभीरता से लेकर राहत पहुंचाता है।


































