वेकोलि की हरित पहल को नई उड़ान, 28 हेक्टेयर खदान भूमि पर होगा वाणिज्यिक बांसारोपण

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वेकोलि की हरित पहल को नई उड़ान, 28 हेक्टेयर खदान भूमि पर होगा वाणिज्यिक बांसारोपण

महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल के साथ चौथे एमओयू पर हस्ताक्षर, 31 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे; पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार और अतिरिक्त राजस्व सृजन पर जोर

नागपुर। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) ने सतत खनन, पर्यावरण संरक्षण और वैकल्पिक राजस्व स्रोत विकसित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल (एमबीडीबी), नागपुर के साथ चौथे समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत बल्लारपुर क्षेत्र की धूपतला ओपनकास्ट खदान की 28 हेक्टेयर पुनर्वासित भूमि पर वाणिज्यिक बांसारोपण परियोजना विकसित की जाएगी।

समझौते पर वेकोलि के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक एवं निदेशक (तकनीकी) डॉ. हेमंत शरद पांडे तथा महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश रंजन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर वेकोलि के निदेशक (वित्त) एवं निदेशक (कार्मिक) बिक्रम घोष तथा निदेशक (तकनीकी-परियोजना एवं आयोजना) एस. एस. परांजपे भी उपस्थित रहे।

इस नए समझौते के साथ वेकोलि की वाणिज्यिक बांसारोपण परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल बढ़कर 121 हेक्टेयर से अधिक हो गया है। इससे पहले मकरधोकरा-III, अमलगमेटेड इंदर-कामठी और सास्ती ओपनकास्ट खदानों की पुनर्वासित भूमि पर भी इस प्रकार की परियोजनाओं का सफल संचालन किया जा चुका है।

धूपतला परियोजना के अंतर्गत 28 हेक्टेयर क्षेत्र में कुल 31,108 पौधे लगाए जाएंगे। इनमें 26 हेक्टेयर क्षेत्र में वाणिज्यिक बांस का रोपण किया जाएगा, जबकि शेष 2 हेक्टेयर में जामुन और अर्जुन जैसी देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। परियोजना के पहले पाँच वर्षों में वेकोलि लगभग 2.57 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जबकि महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल पौधारोपण, रखरखाव, कटाई, विपणन और बांस की बिक्री की जिम्मेदारी निभाएगा।

15 वर्ष की अवधि वाली इस परियोजना में आठवें वर्ष तक निवेश की लागत की भरपाई होने का अनुमान है। राजस्व साझेदारी मॉडल के अनुसार शुद्ध लाभ का 85 प्रतिशत वेकोलि को और 15 प्रतिशत महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल को सुविधा शुल्क के रूप में प्राप्त होगा।

वेकोलि के अनुसार यह परियोजना केवल अतिरिक्त आय का माध्यम नहीं बनेगी, बल्कि पुनर्वासित खदान भूमि के पर्यावरणीय पुनर्स्थापन, कार्बन अवशोषण, मृदा संरक्षण, धूल नियंत्रण और जैव विविधता के संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही स्थानीय समुदायों, विशेषकर परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

खनन के साथ हरित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में वेकोलि और महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल की यह साझेदारी एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं पुनर्वासित खदान क्षेत्रों को उत्पादक हरित परिसंपत्तियों में बदलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेंगी।

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