चमकेल ने सरकार की इथेनॉल नीति पर उठाये सवाल

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चमकेल ने सरकार की इथेनॉल नीति पर उठाये सवाल

-सरकार के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के तुगलकी फैसले से जनता की गाड़ियां हो रही हैं कबाड़, रीवा में भी आ रही लगातार शिकायतें- वर्षा विवेक चमकेल

-क्रूड ऑयल में रिकॉर्ड गिरावट के बाद भी देश में मची है खुली लूट

रीवा। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेंटी सफाई मजदूर कामगार प्रकोष्ठ की प्रदेश महामंत्री एवं रीवा संभाग प्रभारी वर्षा विवेक चमकेल ने पेट्रोल में बिना सोचे-समझे की जा रही इथेनॉल की मिलावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल रिकॉर्ड स्तर पर टूटने के बावजूद देश में ईंधन के दाम कम न करने को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रामाणिक आंकड़ों के साथ इसे जनता की जेब पर सरकार-प्रायोजित “दिनदहाड़े डकैती” करार दिया।

-बिना पर्याप्त टेस्टिंग से जनता की गाड़ियां बनीं प्रयोगशाला
वर्षा चमकेल ने कहा कि मोदी सरकार ने बिना व्यापक जन-जागरूकता के करोड़ों पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा को ताक पर रखकर पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का जोखिम भरा प्रयोग जनता पर थोप दिया है। सरकार अपनी ‘इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल’ नीति के तहत सालाना करीब 1,759 करोड़ लीटर इथेनॉल की खपत बढ़ाने पर आमादा है। सरकार का पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलावट का लक्ष्य तय समय से पहले ही पूरा कर लिया गया है और अब सरकार इसे 25% तक ले जाने पर विचार कर रही है जबकि पुराने वाहनों के लिए यह पहले से ही परेशानी का सबब बना हुआ है। भारत में बने वाहन इथेनॉल के लायक नहीं बने है फिर भी सरकार ने लागू कर दिया।
वर्षा ने कहा कि सरकार का तर्क है कि इससे तेल आयात बिल घटेगा, लेकिन इस बचत का लाभ जनता तक नहीं पहुंचता जबकि इसका फायदा चंद शराब और चीनी मिल उद्योगपतियों की जेब में जा रहा है। ऑटोमोबाइल सेक्टर को पूरी तरह तैयार किए बिना लागू की गई इस नीति का खामियाजा आज हर मोटरसाइकिल और कार चालक भुगत रहा है। इथेनॉल की नमी सोखने की प्रवृत्ति से टंकियों में नमी जमा हो रही है, महंगे फ्यूल इंजेक्टर-पंप चोक हो रहे हैं, कार्बोरेटर-पिस्टन गल रहे हैं और पाई-पाई जोड़कर खरीदी गाड़ी कबाड़ में बदल रही है तथा जनता को हर महीने हजारों रुपये मेंटेनेंस में फूंकने पड़ रहे हैं।

-क्रूड सस्ता होने के बावजूद जनता से वसूली क्यों?
वर्षा चमकेल ने सवाल उठाया — जून 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 45 डॉलर टूटकर 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट पर पहुंच गया था, फिर भी भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम 25 मई के बाद से एक रुपया भी नहीं घटे। उन्होंने याद दिलाया कि ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान जब कच्चा तेल 127 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था, तब मोदी सरकार ने युद्ध का हवाला देकर पेट्रोल-डीजल को 100-110 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचा दिया था। आज हालात पलट चुके हैं, लेकिन सरकार जनता को वह राहत नहीं दे रही। उन्होंने सरकार के इस बहाने को भी खारिज किया कि तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है। उन्होंने कहा की सरकार आम जनता को लूटने में लगी है वही विश्व स्तर पर कई देशों ने क्रूड की गिरावट का सीधा लाभ अपनी जनता तक पहुंचाया है। सरकार पहले युद्ध का बहाना देकर दाम बढ़ाती है, और शांति के दौर में कंपनियों के घाटे का बहाना देकर दाम घटाने से बचती है। यह दोहरा रवैया सीधे जनता की जेब पर डाका है।

रीवा में भी लगातार आ रही हैं शिकायतें- सरकार को ऑप्शन देना चाहिए। प्रदेश महामंत्री एवं रीवा संभाग वर्षा चमकेल ने कहा की रीवा में भी वाहन मालिकों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि इथेनोल E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनकी गाड़ियां बार-बार खराब हो रही हैं, माइलेज घट गया है और मेंटेनेंस का खर्च कई गुना बढ़ गया है। कई वाहन चालकों ने बताया कि उनकी गाड़ियां बीच रास्ते में अचानक बंद हो गईं। उन्होंने कहा कि यह अब सिर्फ राष्ट्रीय स्तर की बहस नहीं बल्कि रीवा जैसे जिलों के आम नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है। उन्होंने मांग कर कहा की जिस प्रकार कई देशों ने इथेनोल पेट्रोल कों अनिवार्य नहीं कर साधारण पेट्रोल मिलने की सुविधा भी दे रखी हैं उसे भारत में भी लागू किया जाना चाहिए। जब तक देश की गाड़ियां इसके अनुकूल न हों तब तक इथेनॉल मिश्रण को कम करना चाहिए तथा भविष्य में 20% से आगे न बढ़ाया जाना चाहिए। चमकेल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा जनता के हक की आवाज़ उठाती है। रीवा सहित पूरे देश से आ रही इथेनोल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियाँ खराबी शिकायतों की स्वतंत्र जांच हो और क्रूड ऑयल घटी कीमतों के अनुपात में पेट्रोल-डीजल की दरें तुरंत घटाकर त्रस्त जनता को राहत दी जाए।

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