19 दिनों से बंद नगर पालिका का पेयजल पंप, बूंद-बूंद पानी को तरसे सैकड़ों लोग

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19 दिनों से बंद नगर पालिका का पेयजल पंप, बूंद-बूंद पानी को तरसे सैकड़ों लोग

दीनदयाल रसोई, पुलिस लाइन और आसपास के वार्डों में गहराया जल संकट, नागरिकों ने नगर पालिका की कार्यशैली पर उठाए सवाल

अनूपपुर। नगर पालिका परिषद अनूपपुर की लापरवाही एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। शहर के पुराने नगर पालिका भवन परिसर में स्थापित पेयजल पंप पिछले 19 दिनों से बंद पड़ा है, जिससे दीनदयाल रसोई, पुलिस लाइन और आसपास के कई वार्डों में रहने वाले सैकड़ों लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय के बाद भी खराब मोटर को न तो बदला गया और न ही उसकी मरम्मत कर पेयजल व्यवस्था बहाल की जा सकी है।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए लोगों को प्रतिदिन इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी दीनदयाल रसोई में भोजन करने आने वाले गरीब, मजदूर एवं जरूरतमंद लोगों को हो रही है। वहीं पुलिस लाइन के कर्मचारी और आसपास के वार्डों के रहवासी भी कई दिनों से पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। लोगों का कहना है कि कई बार नगर पालिका को शिकायत और सूचना देने के बावजूद आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

नागरिकों का आरोप है कि यदि किसी वीआईपी क्षेत्र में ऐसी स्थिति उत्पन्न होती तो कुछ ही घंटों में मोटर बदलकर पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाती, लेकिन आम जनता की परेशानी को लेकर नगर पालिका प्रशासन उदासीन बना हुआ है। 19 दिनों तक एक खराब मोटर को नहीं बदल पाना नगर पालिका की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

शहरवासियों का कहना है कि नगर पालिका का सबसे पहला दायित्व नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन सबसे बुनियादी सुविधा ही लोगों को नहीं मिल रही है। बरसात के मौसम में भी पेयजल संकट बने रहना प्रशासनिक तैयारी और व्यवस्था की पोल खोल रहा है। लोगों का कहना है कि नगर पालिका विकास कार्यों के दावे तो करती है, लेकिन आवश्यक जनसुविधाओं के रखरखाव पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

नागरिकों ने नगर पालिका अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों से तत्काल खराब मोटर बदलकर पेयजल आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो मजबूर होकर जनआंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी।

इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर 19 दिनों तक एक खराब मोटर क्यों नहीं बदली जा सकी? क्या आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान केवल कागजों तक सीमित रह गया है? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा प्रभावित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आखिर कब जागेंगे? नगरवासियों का स्पष्ट कहना है कि पेयजल कोई सुविधा नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है, और इस अधिकार की अनदेखी प्रशासनिक संवेदनहीनता का उदाहरण बनती जा रही है।

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