दो दलों में बंटे हाथियों का आतंक जारी, दो दिनों में कई गांवों में मचाई तबाही
घर तोड़े, फसलें और अनाज किया बर्बाद, एक हाथी पहुंचा छत्तीसगढ़ तो तीन भोलगढ़ के जंगल में डटे
कोयलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर : शशिधर अग्रवाल
अनूपपुर। जिले के अनूपपुर और जैतहरी वन क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से चार हाथियों का दल ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। हाथियों का समूह तीन और एक की संख्या में अलग-अलग होकर जंगलों और गांवों के बीच लगातार विचरण कर रहा है। दिन में जंगलों में विश्राम करने के बाद देर शाम और रात होते ही हाथी आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचकर घरों, खेतों और बाड़ियों में जमकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है, वहीं वन विभाग की टीमें हाथियों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर बनाए हुए हैं।
वन विभाग के अनुसार तीन हाथियों का समूह 2 जुलाई को खांड़ा और भोलगढ़ के बीच स्थित जंगल में रुका था। रात होते ही हाथी जंगल से निकलकर खांड़ा गांव पहुंचे, जहां बांध के पास खेत में बने मोहन सिंह के मकान को चार अलग-अलग स्थानों से तोड़ते हुए पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। बताया जा रहा है कि हाथियों ने इस मकान को आठवीं बार निशाना बनाया। घर में रखा चावल और अन्य खाद्यान्न भी हाथियों ने खा लिया। इसके बाद साहेब सिंह के रसोईघर और गौशाला की दीवार तोड़कर नुकसान पहुंचाया।
अगले दिन तीनों हाथियों ने भोलगढ़ के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पार किया और सोन नदी पार कर ग्राम पंचायत हर्री के भगतबांध गांव पहुंच गए। यहां भगवानदास राठौर, जगतनारायण राठौर, रमेश राठौर, नेमसाय राठौर सहित कई किसानों के खेतों और बाड़ियों में लगी धान, सब्जियां और अन्य फसलों को रौंदते हुए भारी नुकसान पहुंचाया। शनिवार सुबह हाथी फिर सोन नदी और राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर भोलगढ़ और खांड़ा के बीच स्थित जंगल में लौट आए, जहां वे दिनभर डेरा डाले रहे।
उधर, एक बड़ा नर हाथी अपने तीन साथियों से अलग होकर लगातार अलग क्षेत्र में विचरण कर रहा है। इस हाथी ने पहले धनगवां बीट के आमापानी जंगल में दिन बिताया और रात में ग्राम पंचायत पड़रिया के चोई गांव के भलुवान टोला पहुंच गया। यहां सीताराम राठौर के घर में तोड़फोड़ कर घर में रखा अनाज और खाद्यान्न खा लिया तथा खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचाया।
इसके बाद हाथी ने पड़रिया के भलुवान टोला में विक्रम सिंह, राजू राठौर, मोरध्वज सिंह, बाबूलाल सिंह, मुन्नी बाई, भूप सिंह सहित कई ग्रामीणों के मकानों में तोड़फोड़ की। वहीं सुखू सिंह, धीरसाय सिंह, बाल सिंह, मिठाईलाल सिंह, रमेश नाई सहित अन्य किसानों के खेतों और बाड़ियों में लगी फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। धनगवां, कुसुमहाई, कुकुरगोंड़ा, बचहा और चोलना पंचायतों से होते हुए यह हाथी शनिवार सुबह गुजरनाला पार कर छत्तीसगढ़ के मरवाही वन परिक्षेत्र के घुसरिया बीट के जंगल में पहुंच गया, जहां दिनभर विश्राम करता रहा।
लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ते जा रहे हैं। जिन परिवारों की संपत्ति और फसलें पहले भी हाथियों के हमलों में नष्ट हो चुकी हैं, उन्हें अब तक पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिलने से नाराजगी है। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों के सामने अपनी नाराजगी भी जताई। दूसरी ओर वन विभाग की टीम दोनों हाथी दलों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रही है और जंगल से लगे गांवों के लोगों को सतर्क रहने तथा रात में अकेले बाहर नहीं निकलने की सलाह दे रही है। ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और किसी भी गतिविधि की तत्काल सूचना वन विभाग को देने के लिए भी कहा गया है।




































