मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ट्वीट कर जताया आभार
मनेन्द्रगढ़। वरिष्ठ साहित्यकार, आध्यात्मिक विचारक और पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी सतीश उपाध्याय ने सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय स्वाभिमान और भारतीय मूल्यों को नई ऊर्जा प्रदान करने वाली ऐतिहासिक पहल बताया है। उन्होंने इस यात्रा के सफल आयोजन के लिये मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यात्रा के संबंध में मुख्यमंत्री को ट्वीट कर धन्यवाद भी प्रेषित किया जिस पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए उनके संदेश की सराहना की।
22 से 26 जून तक आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा में सहभागी रहे सतीश उपाध्याय ने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय अस्मिता और आध्यात्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनी। उन्होंने बताया कि यात्रा का शुभारंभ 22 जून को रायपुर रेलवे स्टेशन से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक और महापौर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से लगभग एक हजार विशिष्ट प्रतिभागियों का चयन किया गया था जिनमें पद्म सम्मान प्राप्त हस्तियां, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कलाकार, साहित्यकार तथा सांस्कृतिक कर्मी शामिल थे। यात्रा का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय गौरव के रूप में नई पहचान दिलाना था।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडे के नेतृत्व में वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव और सतीश उपाध्याय ने मनेन्द्रगढ़ के पवित्र देवालयों की मिट्टी एवं पावन जल सोमनाथ मंदिर में श्रद्धापूर्वक अर्पित किया। यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने सोमनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी सहभागिता की।
यात्रा के अनुभव साझा करते हुए सतीश उपाध्याय ने कहा कि इस आयोजन ने ना केवल भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को निकट से समझने का अवसर दिया बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये विशिष्ट जनों के बीच संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पारस्परिक समझ को भी सुदृढ़ किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और भारतीय मूल्यों की जीवंत अभिव्यक्ति थी। उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एक हजार से अधिक लोगों की इस ऐतिहासिक यात्रा ने प्रदेश की लोक परंपराओं, कला, साहित्य और आध्यात्मिक धरोहर को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने का कार्य किया है। उनके अनुसार इस स्वाभिमान यात्रा से छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक जागरूकता, राष्ट्रीय गौरव और भारतीय जीवन मूल्यों के प्रति नई प्रेरणा और चेतना का संचार हुआ है।




































