जनगणना में ‘आदिवासी’ के रूप में अलग पहचान की मांग तेज, राष्ट्रपति को पोस्टकार्ड भेजेगी गोंड आदिवासी महासभा

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जनगणना में ‘आदिवासी’ के रूप में अलग पहचान की मांग तेज, राष्ट्रपति को पोस्टकार्ड भेजेगी गोंड आदिवासी महासभा

वन अधिकार कानून के पालन और आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा को लेकर कन्हारी में हुई महत्वपूर्ण बैठक, कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित

अनूपपुर। मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़ गोंड आदिवासी महासभा की अनूपपुर एवं जीपीएम जिला समिति की संयुक्त बैठक रविवार को ग्राम कन्हारी में आयोजित की गई। बैठक में आदिवासी समाज की पहचान, संवैधानिक अधिकारों एवं वन अधिकार कानून से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।

बैठक की अध्यक्षता महासभा के अध्यक्ष रामसिंह ने की। बैठक में संगठन के सचिव समर शाह सिंह सहित पदाधिकारी मुद्रिका सिंह, जीवन सिंह, कुंवर सिंह, रोतन सिंह, संतोष सिंह, लल्लू सिंह, जय सिंह, धोकल सिंह, लालन सिंह, मोहन सिंह, विमल सिंह सहित बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक में पारित प्रथम प्रस्ताव में आगामी जनगणना के दौरान आदिवासी समुदाय को अलग श्रेणी में “आदिवासी” के रूप में दर्ज करने की मांग उठाई गई। महासभा के पदाधिकारियों का कहना था कि आदिवासी समुदाय की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराएं, जीवनशैली एवं सामाजिक पहचान है, इसलिए उन्हें उनकी अलग पहचान के साथ दर्ज किया जाना चाहिए। इस मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए संगठन ने 30 जून तक राष्ट्रपति के नाम पोस्टकार्ड अभियान चलाने का निर्णय लिया।

बैठक में दूसरा प्रमुख प्रस्ताव वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पारित किया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि कानून में आदिवासी क्षेत्रों के विकास और मूलभूत सुविधाओं के लिए उपलब्ध प्रावधानों के बावजूद कई स्थानों पर वन विभाग के स्तर पर अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं, जिससे आदिवासी समुदाय को अपने वैधानिक अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

महासभा ने मांग की कि वन विभाग वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करे तथा आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए आवश्यक अनुमतियां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय पर प्रदान की जाएं।

बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों, पहचान और विकास से जुड़े मुद्दों पर संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा। बैठक के अंत में दोनों प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित कर आगामी रणनीति पर भी चर्चा की गई।

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