जनपद पंचायत जयसिंहनगर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कुदरी में आगामी पंचायत चुनाव और परिसीमन को लेकर जमीनी स्तर पर सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

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शहडोल। जनपद पंचायत जयसिंहनगर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कुदरी में आगामी पंचायत चुनाव और परिसीमन को लेकर जमीनी स्तर पर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पिछले ढाई दशकों से विकास की मुख्यधारा में अपनी सही भागीदारी तलाश रहे अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के अधिकारों को लेकर अब क्षेत्र में एक बड़ी वैचारिक क्रांति की शुरुआत हुई है।

क्षेत्र के प्रखर, समर्पित और लोकप्रिय युवा समाजसेवी  कैलाश कुमार अहिरवार ने इस गंभीर मुद्दे पर एक मजबूत मुहिम छेड़ दी है। इस मुहिम के तहत ग्राम पंचायत कुदरी के समस्त ग्रामीणों ने एकजुट होकर शहडोल कलेक्टर को एक औपचारिक आवेदन पत्र सौंपा है। ग्रामीणों की मांग है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और आरक्षण चक्रानुक्रम (Rotation) नियम के तहत आगामी चुनाव में सरपंच पद की सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित की जाए।

 

कई वर्षो से एक ही वर्ग के पास नेतृत्व, रोटेशन नियम लागू करने की मांग

कलेक्टर महोदय को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, ग्राम पंचायत कुदरी में पिछले 25 वर्षों (वर्ष 2000 से अब तक) से सरपंच का पद लगातार एक ही वर्ग (अनुसूचित जनजाति – ST) के लिए आरक्षित चला आ रहा है। वर्ष 2000 से 2005 तक दलेल सिंह, 2005 से 2010 तक मोती लाल सिंह, 2010 से 2015 तक बिट्टी बाई, 2015 से 2022 तक पुनः दलेल सिंह और वर्तमान में चंद्रवती सिंह इस पद पर दायित्व निभा रहे हैं।

 

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की है। इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद चक्रानुक्रम नियम का पालन न होने से इस वर्ग को पिछले कई वर्षो से नेतृत्व करने का एक भी अवसर नहीं मिला है, जिससे समाज का सर्वांगीण उत्थान प्रभावित हो रहा है।

 

विकास की गति ठप, बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही जनता

युवा समाजसेवी कैलाश कुमार अहिरवार ने पंचायत में विकास की जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए कहा कि एक ही प्रशासनिक ढर्रे के कारण क्षेत्र में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ चुके हैं और व्यवस्था में पारदर्शिता का घोर अभाव है। आज भी पंचायत के पास खुद का कोई सार्वजनिक सामुदायिक भवन नहीं है, जिसके कारण ग्रामीणों को शादी-ब्याह या अन्य सामाजिक आयोजनों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अधिकांश मोहल्लों में पक्की पीसीसी (PCC) सड़कें न होने के कारण लोग कीचड़ और बदहाली के बीच जीने को मजबूर हैं। नियमित और पारदर्शी ग्राम सभाएं न होने से जनता की आवाज दब कर रह गई है।

 

“हमारा उद्देश्य किसी व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि हर वर्ग को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाना है। अनुसूचित जाति वर्ग के उत्थान और उनके हक के लिए मैं हमेशा मजबूती से खड़ा रहा हूँ और आगे भी रहूँगा। जब तक कुदरी पंचायत में बुनियादी ढांचा सुदृढ़ नहीं होता और पारदर्शिता नहीं आती, हमारी यह न्यायपूर्ण मुहिम जारी रहेगी।”

कैलाश कुमार अहिरवार (युवा समाजसेवी)

 

निष्पक्ष जांच और सामाजिक न्याय की गुहार

कैलाश कुमार अहिरवार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि ग्राम पंचायत कुदरी की सामाजिक और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए आगामी परिसीमन में सरपंच पद ‘अनुसूचित जाति’ के लिए आरक्षित किया जाए। इसके साथ ही, विगत वर्षों में पंचायत के विकास कार्यों के नाम पर हुए खर्चों की एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और क्षेत्र का वास्तविक विकास हो सके।

युवा नेतृत्व की इस सकारात्मक पहल और सामाजिक न्याय की इस मुहिम को क्षेत्र के युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों का भारी समर्थन मिल रहा है।

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