शहडोल
गंभीर सड़क हादसे में बुरी तरह घायल युवक को मिला नया जीवन, डॉक्टरों की मेहनत और आयुष्मान भारत योजना का दिखा असर
कभी अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा एक युवक आज अपने पैरों पर खड़ा होकर चल रहा है। यह कहानी है सीधी जिले के ग्राम बिटकुरी निवासी बालेंद्र सिंह की, जिनकी जिंदगी एक भीषण सड़क दुर्घटना के बाद लगभग थम सी गई थी। लेकिन चिकित्सकों की अथक मेहनत, आधुनिक उपचार और आयुष्मान भारत योजना के सहयोग ने उन्हें नया जीवन दे दिया।
लगभग दो माह पूर्व बालेंद्र सिंह बाइक से यात्रा के दौरान एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। हादसा इतना भयावह था कि उनके पैर में गंभीर चोटें आईं, पैर की काफी चमड़ी निकल चुकी थी और संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा था। स्थिति को देखते हुए परिजनों को आशंका थी कि कहीं उनका पैर काटना न पड़ जाए।
गंभीर अवस्था में उन्हें श्रीराम अस्पताल, शहडोल में भर्ती कराया गया। यहां वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अमोल पांडेय के नेतृत्व में उनका उपचार शुरू किया गया। जटिल घावों और क्षतिग्रस्त ऊतकों को देखते हुए प्लास्टिक सर्जन डॉ. सतीश सिंह ने भी उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉक्टरों की विशेषज्ञता, लगातार निगरानी और समर्पित प्रयासों से धीरे-धीरे बालेंद्र की स्थिति में सुधार होने लगा।
करीब दो महीने तक चले उपचार और कई चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के बाद आज बालेंद्र सिंह फिर से अपने पैरों पर खड़े होकर चलने लगे हैं। यह दृश्य उनके परिवार, अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों के लिए बेहद भावुक और गर्व का क्षण रहा।
बालेंद्र सिंह ने बताया कि वे एक साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं। दुर्घटना के बाद उन्हें लगा था कि शायद वे कभी सामान्य जीवन नहीं जी पाएंगे। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत उन्हें निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिला, जिससे उनका जीवन बदल गया। उन्होंने श्रीराम अस्पताल, डॉ. अमोल पांडेय, डॉ. सतीश सिंह और पूरी चिकित्सा टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह कहानी केवल एक मरीज के स्वस्थ होने की नहीं, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि समय पर मिला बेहतर इलाज, चिकित्सकों का समर्पण और सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं मिलकर असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों को भी बदल सकती हैं।






































