उमरिया जिले की यह घटना बताती है कि शासकीय तंत्र कितना भ्रष्ट और मनमाना हो चुका है।

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शहडोल

पुलिस जिसे हम अपनी रक्षक मानते हैं अगर वह ही भक्षक बन जाए तब सवाल पैदा होता है आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर।

खास तौर पर जब किसी लड़की या महिला की सुरक्षा की बात हो तब पुलिस का ऐसा रवैया उसे कठघरे में खड़ा करता है।

 

शहडोल जिले की रहने वाली पायल वर्मा ने अपने साथ उमरिया ज़िले में बीती घटना की जानकारी दी और न्याय की गुहार के लिए पुलिस महानिरीक्षक शहडोल के पास भी पहुंची और आवेदन दिया,

 

उन्होंने बताया कि “मेरे नाना गोलईया वर्मन की जमीन वॉर्ड नं 01 लोहारगंज उमरिया में है।

उन्होंने अपने बड़े बेटे लक्ष्मीचंद्र वर्मन को जमीन दी थी।

छोटे बेटे गणेश वर्मन ने अपना हिस्सा पहले ही ले लिया था,

 

लेकिन बाद में वह बड़े भाई की जमीन भी बेचने लगा।

इस वजह से बड़े भाई ने अपनी जमीन पर कच्चा मकान बनाना शुरू कर दिया।

इसी दौरान नगर पालिका के कुछ कर्मचारी बिना किसी नोटिस के मकान तोड़ने आ गए। जब इन्होंने नोटिस दिखाने को कहा और विरोध किया,

तो नगरपालिका के कर्मचारियों ने और उनके छोटे मामा के घरवालों ने गाली-गलौज की, मारपीट की, औरतों के साथ बदतमीजी की और जान से मारने की धमकी दी।

पायल वर्मा और उसके परिवारजनों ने इस घटना का वीडियो बना लिया।

इसके बाद वो सिविल लाइन थाना, उमरिया में शिकायत करने गए , जहां उसकी मुलाकात राजेंद्र चंदेल, वंदना और कुछ पुलिस वालो से हुई

लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की।

फिर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की।

इसके बाद थाने से फोन आया और पायल वर्मा को शाम 6 बजे के बाद घर वालों के साथ बयान देने के लिए 23 मई को बुलाया गया।

 

जब वो थाने पहुँची, तो पुलिस वालों ने उसकी शिकायत सुनने के बजाय उस पर ही झूठे आरोप लगाने शुरू कर दिए।

 

उन्होंने कहा कि नोटिस एक महीने से थाने में पड़ा था, तुम लोग लेने क्यों नहीं आए।

जब पायल वर्मा ने कहा कि नोटिस की जानकारी देना आप का काम है पर आप ने नहीं बताया तो वे गाली देने लगे।

तब पायल वर्मा ने वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

पुलिस वालों ने कहा कि बड़े साहब आएंगे तब बयान लिया जाएगा और पायल वर्मा और परिवारजनों को जबरदस्ती थाने में बिठाया गया।

पायल वर्मा ने बताया कि बड़े साहब के आने के बाद पुलिस वाले आपस में कुछ बात करने लगे और फिर उन्होंने मुझे मारना शुरू कर दिया।

उसने बताया कि उसे घसीटा गया, बाल पकड़कर मारा गया और उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया।

उपस्थित पुलिस वाले उससे जबरदस्ती फोन का पासवर्ड पूछ रहे थे।

जब उसने पासवर्ड बताने से मना किया, तो उन्होंने नेहा वर्मा को और मारा।

और उसपर केस एवं सीएम हेल्प लाईन की शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने लगे,

किसी तरह वो अपनी जान बचाकर वहाँ से भागी और दूसरे थाने कोतवाली गई, जहां पर उसकी बात चीत संत बहादुर से हुई लेकिन वहाँ भी उसकी बात सुनने के बजाय उसके साथ जबरदस्ती मारपीट की गई और फोन रिसेट करने की धमकी दी गई।”

पीड़िता के द्वारा बताई गई बातें अगर सच है तो उमरिया पुलिस का चेहरा इतना घिनौना हो सकता है इसका अंदाजा भी किसी ने नहीं लगाया होगा,

 

पुलिस महानिरीक्षक शहडोल जोन ने मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने की बात कही है अब देखना है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर मामला रफादफा कर दिया जाएगा।

 

बाइट – पायल वर्मा, पीड़िता

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