सैकड़ों शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, सीएम हेल्पलाइन से लेकर जनपद पंचायत तक गुहार लगाने के बाद भी समाधान का इंतजार
जमुना कोतमा। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन ग्राम पंचायत सकोला में यह योजना ग्रामीणों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बनती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन कई स्थानों पर टूट चुकी है, जिससे हजारों लीटर पानी प्रतिदिन व्यर्थ बह रहा है। वहीं पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों और नालियों की मरम्मत भी आज तक नहीं कराई गई है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर सीएम हेल्पलाइन, जनपद पंचायत और संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पाइपलाइन बिछाने के बाद नहीं हुई मरम्मत
ग्रामीणों के अनुसार नल-जल योजना के तहत गांव के विभिन्न वार्डों और मोहल्लों में पाइपलाइन बिछाने के लिए सीसी सड़कों को ड्रिल मशीन से काटकर गहरी नालियां बनाई गईं। कार्य पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी और पंचायत द्वारा सड़कों की समुचित मरम्मत नहीं कराई गई। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और राहगीरों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब इन गड्ढों में पानी भर जाने से लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता और जवाबदेही दोनों की अनदेखी की गई है।
कई वार्डों में नहीं पहुंचा पानी
ग्रामीणों ने बताया कि कई वार्डों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन आज तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। कुछ घरों में केवल पाइप डालकर कनेक्शन दे दिया गया, जबकि पानी की व्यवस्था नहीं की गई। इससे योजना का उद्देश्य अधूरा रह गया है और ग्रामीणों को आज भी पेयजल के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
कई स्थानों पर पाइपलाइन टूटने के कारण पानी सड़कों और गलियों में बह रहा है, जिससे जल की बर्बादी के साथ-साथ कीचड़ और गंदगी की समस्या भी उत्पन्न हो रही है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर पिछले कई वर्षों से लगातार शिकायतें की जा रही हैं। सीएम हेल्पलाइन से लेकर जनपद पंचायत तक अनेक बार आवेदन और शिकायतें दी गईं, लेकिन किसी भी मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों की जांच केवल कागजों तक सीमित रह जाती है और जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे लोगों का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था पर कमजोर पड़ता जा रहा है।
पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
गांव के लोगों का कहना है कि पूरे गांव की मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत और उसके जनप्रतिनिधियों की होती है, लेकिन नल-जल योजना की खामियां, टूटी पाइपलाइनें और अधूरे मरम्मत कार्य पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि उच्च स्तर पर निगरानी और कार्रवाई के अभाव में जिम्मेदार लोगों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। यही कारण है कि समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं।
ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत सकोला में नल-जल योजना के तहत हुए कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही पाइपलाइन बिछाने, सड़क मरम्मत, जलापूर्ति व्यवस्था और योजना में खर्च की गई राशि का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में जन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर टूटी पाइपलाइन की मरम्मत, जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी शिकायतों पर प्रशासन कब संज्ञान लेता है और नल-जल योजना की खामियों को दूर कर लोगों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।





































