– डॉ. विनोद पांडेय
एमसीबी। जिले के ग्राम पोड़ी में स्थित जगन्नाथ मंदिर आज श्रद्धा और स्थापत्य कला का अनोखा प्रतीक बन चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर ग्राम नागपुर से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित यह भव्य मंदिर उड़ीसा के प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी धाम की झलक प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि लोग इसे “छोटा पुरी धाम” के नाम से भी पहचानने लगे हैं।
इतिहासकार डॉ. विनोद पांडेय के अनुसार चिरमिरी क्षेत्र में निवासरत उत्कल समाज की वर्षों पुरानी आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव ने इस मंदिर की नींव रखी। समाज के लोगों के लिये बार-बार पुरी धाम जाना संभव नहीं था इसलिये स्थानीय स्तर पर भगवान जगन्नाथ का विशाल मंदिर निर्माण कराने का संकल्प लिया गया।
वर्ष 1982 में महंत श्री गणपत परिमाराय के नेतृत्व में मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और वर्ष 2006 में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। उत्कल शैली में निर्मित मंदिर की भव्य संरचना, ऊंचे शिखर और दीवारों पर उकेरी गई देवी-देवताओं की कलात्मक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को विशेष आकर्षित करती हैं। मंदिर की नक्काशी इतनी जीवंत प्रतीत होती है मानो पत्थरों में आस्था सांस ले रही हो।
यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं बल्कि सांस्कृतिक आयोजनों का भी प्रमुख स्थल बन गया है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य रथ यात्रा (गुण्डिचा यात्रा) निकाली जाती है जबकि नवरात्रि में विशाल मेले और भंडारे का आयोजन होता है। इन आयोजनों में जिले सहित दूर-दराज क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
प्राकृतिक सुंदरता से घिरे पोड़ी गांव में स्थित यह मंदिर अब धार्मिक पर्यटन के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है। श्रद्धा, संस्कृति और उत्कल वास्तुकला का यह संगम आने वाले हर व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और अद्भुत सौंदर्य का अनुभव कराता है।



































