विकास प्रक्र‍िया में जनजातीय समाज को शामिल करने प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बनाई नीतियां: मंत्री डॉ. शाह

---Advertisement---

 

 

*तकनीकी आधारित जनजाति विकास की अवधारणा पर कार्यशाला का शुभारंभ*

 

अनूपपुर 19 मई 2026/जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने जनजातीय समाज की पीड़ा को समझा और विकास प्रक्र‍िया में उनकी भागीदारी सुनश्च‍ित करने के लिए प्रभावी नीतियां बनायी हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष जैसी पहल से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए ठोस कार्य हो रहे हैं। वे मंगलवार को भोपाल के आदि भवन में जनजातीय गरिमा उत्सव के तहत तकनीकी आधारित सतत् जनजाति विकास अवधारणा पर आयोजित कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में प्रमुख सचिव श्री गुलशन बामरा, आयुक्त डॉ. सतेंद्र सिंह सहित प्रदेश से आए विभाग के मैदानी अधिकारी उपस्थित थे। भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।

 

मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि वे वर्ष 1990 से लगातार जनजातीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जनजातीय समाज के साथ लगातार कार्य किया है। विभागीय अधिकारी भी सतत् रूप से गांवों में और वनवासी अंचल के बीच जाएं और उनके जीवन को नजदीक से देखें। साथ ही प्रत्यक्ष अनुभव से जो परिस्थितियां सामने आती है उसे समझें और उसके अनुरूप कार्य करें। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जनजाति वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं को उनके द्वार तक पहुँचाने के लिए “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान में शिविरों के माध्यम से 18 विभागों की 25 योजनाओं का लाभ जनजाति वर्ग के ग्रामीणों को दिलाया जाएगा।

 

मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि किस तरह से वनवासी अंचल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि सन 1990 के दशक से लेकर अब तक स्थ‍ितियां बदल गयी है। आज जनजातीय समाज, विकास की मुख्यधारा में शामिल हैं। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में आंगनवाड़ी केंद्रों में 50 हजार पानी की बॉटल वितरित कर रहे हैं। साथ ही पहली से कक्षा बारहवीं कक्षा तक के 45 हज़ार बच्चों को पेयजल के लिए पानी की बॉटल प्रदान की हैं। अपने विधानसभा क्षेत्र की 150 ग्राम पंचायतों में वॉटर कूलर और आरओ लगाया हैं। इससे हर गाँव, हर स्कूल में शुद्ध पेयजल सुलभ होगा। उन्होंने कहा कि जनजाति अंचल की बच्चियां शहर के कॉलेज जाने में हिचकिचाती हैं और सुविधाओं के अभाव में उच्च शिक्षा छोड़ भी देती है। ऐसी परिस्थितियों में उन्होंने प्रायोगिक तौर पर अपने क्षेत्र में 4 बसें संचालित की, जिससे कॉलेज जाने वाली बालिकाओं की संख्या 30 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा का अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार होना चाहिए।

 

कार्यशाला में आयुक्त जनजातीय क्षेत्र विकास डॉ. सतेंद्र सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यशाला में आजीविका तथा रोज़गार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग पर मैनिट के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. संयम शुक्ला ने अपना उद्बोधन दिया। सतत जनजातीय विकास में जीआईएस तथा उपग्रह सुदूर संवेदन विषय पर आईआईएसईआर के एसोसियेट प्रोफेसर डॉ. कुमार गौरव ने भी संबोधित किया।

 

कार्यशाला के द्वितीय सत्र में जनजातीय आजीविका तथा उद्यमिता विकास विषय पर आईएएस आरएम ट्राइफेड श्रीमती प्रीति मैथिल ने संबोधित किया। ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारतीय कृषि को बदल रहा है’ विषय पर आईआईआईटी के असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. शुभ्रज्‍योति देब ने संबोधित किया। साथ ही “स्वास्थ्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग” विषय पर आईआईआईटी के असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. निखिल कुमार सिंह ने जानकारी दी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment