आक्रोशित दंतैल हाथी का आतंक जारी: सात मवेशियों को मार डाला, कई घर किए तबाह, भय में जी रहे ग्रामीण

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कोयलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर शशिधर अग्रवाल

 

अनूपपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में एक आक्रोशित दंतैल हाथी का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते एक माह से छत्तीसगढ़ सीमा से अनूपपुर जिले में पहुंचे इस खतरनाक हाथी ने अब तक सात पालतू मवेशियों को मौत के घाट उतार दिया है, जबकि कई ग्रामीणों के घरों और खेतों में भारी नुकसान पहुंचाया है। हाथी के लगातार हमलों से ग्रामीण भय और दहशत के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

 

रविवार देर रात जिला मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खांडा में हाथी ने बोधन सिंह के खेत में चर रही तीन वर्षीय बछिया पर हमला कर उसे मार डाला। ग्रामीणों के अनुसार हाथी ने बछिया को दौड़ा-दौड़ाकर अपने दांतों से हमला किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद हाथी ने खेत में लगे कटहल और बांस के पेड़ों को नुकसान पहुंचाया तथा दो झोपड़ियों को भी तोड़ दिया।

 

इसी दौरान हाथी ने ग्रामीण मोहन सिंह उर्फ ललऊ के कच्चे मकान पर सातवीं बार हमला कर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। गौशाला में भी तोड़फोड़ की गई और कुएं के ऊपर रखे लकड़ी के पट्टों को अंदर फेंक दिया गया। लगातार हो रहे हमलों के कारण मोहन सिंह अपने परिवार के साथ रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं।

 

ग्रामीणों का कहना है कि हाथी को भगाने की कोशिश करने पर वह चिघाड़ते हुए लोगों का पीछा करता है और हमला करने दौड़ पड़ता है। इससे गांवों में दहशत का माहौल है। कुछ दिन पहले यही हाथी सोनमौहरी और सेंदुरी गांव में छह मवेशियों को मार चुका है, जबकि एक अन्य मवेशी गंभीर रूप से घायल है।

 

हाथी ने अमगवां के गणेश सिंह, सोनमौहरी के रामसहाय सिंह, खांडा के कृष्ण कुमार साहू, मोहन सिंह और बोधन सिंह के घरों में भी नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिले के प्रभारी मंत्री एवं वन राज्यमंत्री को स्थानीय जनता की परेशानियों की चिंता नहीं है।

 

वन विभाग द्वारा हाथी की निगरानी के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारी निगरानी करने के बजाय शासकीय वाहन का उपयोग निजी कार्यों और रिश्तेदारी निभाने में कर रहे हैं।

 

वन विभाग ने शासन स्तर पर हाथी को जिले से बाहर करने अथवा रेस्क्यू करने के लिए पत्राचार किया है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

 

उधर जैतहरी क्षेत्र के धनगवां बीट के आमापानी जंगल में तीन हाथियों का समूह पिछले तीन दिनों से डेरा डाले हुए है। वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है, लेकिन हाथियों की गतिविधियों से आसपास के गांवों में दहशत बनी हुई है।

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