जनपद पंचायत जैतहरी में सीए नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
निविदा नियमों की अनदेखी और मिलीभगत के आरोप, सीईओ ने कहा- प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी
जमुना कोतमा जनपद पंचायत जैतहरी में चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश भंडार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 यथा संशोधित 2022 के प्रावधानों की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और नियम पालन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार जनपद पंचायत द्वारा जारी विज्ञापन दिनांक 09 मार्च 2026 का था, जबकि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 24 मार्च 2026 निर्धारित की गई थी और 25 मार्च को निविदा खोल दी गई। आरोप है कि नियमानुसार निविदा प्रक्रिया में पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था, लेकिन यहां लगभग 15 दिनों में पूरी प्रक्रिया संपन्न कर दी गई। इसे नियमों के विपरीत बताते हुए चयन प्रक्रिया में मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं।
मामले में मध्य प्रदेश भंडार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 के बिंदु 37 (ii) का हवाला देते हुए कहा गया है कि निविदा प्रक्रिया में पर्याप्त समय देना आवश्यक होता है ताकि अधिक से अधिक पात्र आवेदक भाग ले सकें। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कम समय मिलने के कारण कई संभावित आवेदक प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके।
इसके अलावा आरोप यह भी है कि विभागीय पोर्टल पर निविदा की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। नियमों के अनुसार टेंडर से संबंधित सभी आवश्यक शर्तें एवं विवरण सार्वजनिक होना चाहिए, लेकिन यहां पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
निविदा में “अधिकृत टैक्स कंसलटेंट” शब्द का उल्लेख किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसकी पात्रता और आवश्यक प्रमाणपत्र स्पष्ट नहीं किए गए, जिससे सामान्य आवेदकों में भ्रम की स्थिति बनी रही।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि ₹1000 शुल्क लेकर निविदा फार्म बेचे गए, लेकिन आवेदन की शर्तों की पूरी जानकारी पहले से सार्वजनिक नहीं की गई। इसे आवेदकों के आर्थिक शोषण से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
इनका कहना है
“नियुक्ति निविदा में 15 दिन का समय दिया गया था, जिसके लिए विधिवत निविदा जारी की गई थी। ‘अधिकृत टैक्स कंसलटेंट’ निगरानी समिति के सदस्य हैं। ₹1000 में फॉर्म बेचना विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा है। पूरे जिले में पहली बार यह प्रक्रिया शुरू की गई है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कहीं भी कोई गड़बड़ी नहीं की गई है।”
— के के रैकवार, सीईओ जनपद पंचायत जैतहरी





































