आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों से राष्ट्र मानचित्रण की नई दिशा

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आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों से राष्ट्र मानचित्रण की नई दिशा

 

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

 

अमरकंटक। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा भारतीय सर्वेक्षण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “आधुनिक भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों के साथ राष्ट्र का मानचित्रण” विषय पर 1 एवं 2 मई को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन भूगोल विभागाध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. चन्द्रमौलि के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. अवधेश कुमार शुक्ला के मुख्य आतिथ्य में हुआ।

 

कार्यशाला में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अधीक्षक अधिकारी (IES) श्री कृष्ण कुमार खरवार एवं उप अधीक्षक अधिकारी (IES) श्री जय प्रकाश पाटीदार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विषय विशेषज्ञ के रूप में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के श्री हेमेन्द्र सोनकुसले, श्री विजय सोनी, श्री राहुल सोनी, ऑफिस सर्वेयर तथा उनकी तकनीकी टीम ने विद्यार्थियों को आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी।

 

कार्यशाला में पृथ्वी विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. ऋचा चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष डॉ. चन्द्रमौलि, डॉ. जानकी प्रसाद एवं डॉ. नारायण बर्मन सहित विभाग के प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

 

दो दिवसीय कार्यशाला में भूगोल विभाग के स्नातक, परास्नातक एवं शोधार्थी विद्यार्थियों को भारतीय सर्वेक्षण विभाग के विशेषज्ञों ने रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन सर्वेक्षण, वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली (GNSS), निरंतर संचालित संदर्भ स्टेशन (CORS) तथा उपग्रह आधारित डाटा के माध्यम से देश के भौगोलिक संसाधनों के सटीक एवं अद्यतन मानचित्रण की प्रक्रिया से अवगत कराया।

 

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को क्षेत्र सर्वेक्षण के दौरान वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली और निरंतर संचालित संदर्भ स्टेशन की कार्यप्रणाली का प्रायोगिक प्रदर्शन कर इसकी उपयोगिता समझाई। कार्यशाला का सबसे आकर्षक केंद्र भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा पहली बार विश्वविद्यालय परिसर में ड्रोन के माध्यम से हवाई मानचित्रण का प्रदर्शन रहा। ड्रोन तकनीक से पूरे विश्वविद्यालय परिसर का हवाई सर्वेक्षण कर विद्यार्थियों को आधुनिक मानचित्रण प्रणाली की प्रत्यक्ष जानकारी दी गई।

 

ड्रोन सर्वेक्षण, जीपीएस प्रणाली, अक्षांश-देशांतर रेखाओं के आधार पर क्षेत्रफल निर्धारण, स्थिति निर्धारण एवं जियोरेफरेंसिंग की प्रक्रिया को देखकर विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों की उपयोगिता को न केवल समझा, बल्कि उन्हें व्यवहारिक रूप में देखकर तकनीकी ज्ञान अर्जित किया।

 

वक्ताओं ने बताया कि आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकें शहरी नियोजन, आपदा प्रबंधन, कृषि विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा आधारभूत संरचना निर्माण जैसे क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही हैं। साथ ही डिजिटल इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों में भू-स्थानिक डाटा की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

 

कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान के साथ-साथ रोजगार और शोध के नए अवसरों की जानकारी भी प्राप्त हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि भू-स्थानिक तकनीकों का बढ़ता उपयोग आने वाले समय में रोजगार, अनुसंधान और नीति निर्माण के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलेगा।

 

कार्यक्रम के समापन पर विभागाध्यक्ष डॉ. चन्द्रमौलि ने भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों, विशेषज्ञों, अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों के तकनीकी ज्ञान, शोध क्षमता और व्यावसायिक दक्षता को नई दिशा प्रदान करती हैं।

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