रेलवे में 29 हजार पद खत्म करने की तैयारी पर एटक भड़की मोदी सरकार पर युवाओं के रोजगार छीनने, ठेका प्रथा बढ़ाने और निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप

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रेलवे में 29 हजार पद खत्म करने की तैयारी पर एटक भड़की
मोदी सरकार पर युवाओं के रोजगार छीनने, ठेका प्रथा बढ़ाने और निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप

नई दिल्ली। एआईटीयूसी (एटक) ने भारतीय रेल में 2 प्रतिशत मानवबल तर्कसंगतकरण के नाम पर 29,608 स्वीकृत पद समाप्त करने के केंद्र सरकार के निर्णय का कड़ा विरोध किया है। एटक ने इसे बेरोजगार युवाओं पर मोदी सरकार का “क्रूर हमला” बताते हुए कहा कि यह फैसला रोजगार के अवसर घटाने, स्थायी भर्ती रोकने और ठेका प्रथा को बढ़ावा देने की सुनियोजित साजिश है।

एटक महासचिव अमरजीत कौर ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर वर्ष 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन यह वादा अब “जुमले से भी बदतर” साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे बोर्ड ने 24 अप्रैल 2026 को जारी परिपत्र में सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को वर्ष 2026-27 के दौरान 2 प्रतिशत मानवबल कटौती लागू करने और त्रैमासिक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। एटक के अनुसार यह निर्णय भारतीय रेल के 14,80,455 स्वीकृत पदों में से 29,608 पद समाप्त करने के बराबर है।

एटक ने कहा कि वर्तमान में भारतीय रेल में लगभग 11 लाख कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि लाखों पद पहले से रिक्त हैं। इसके अतिरिक्त जुलाई 2022 तक 5.87 लाख से अधिक ठेका श्रमिक पंजीकृत थे। ऐसे में पद समाप्त करने का निर्णय स्पष्ट रूप से रेलवे को आउटसोर्सिंग और ठेका मॉडल की ओर धकेलने वाला कदम है।

संगठन ने कहा कि रेलवे लगातार नई ट्रेनें चला रही है, वंदे भारत और अमृत भारत जैसी तेज रफ्तार सेवाएं बढ़ा रही है, लाइनों का दोहरीकरण और विद्युतीकरण कर रही है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय कटौती की जा रही है। एटक के अनुसार इसका सीधा असर रेलवे सेवाओं की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा पर पड़ेगा। संगठन ने आरोप लगाया कि लोको पायलट 12 घंटे से अधिक ड्यूटी करने को मजबूर हैं, महिला लोको पायलटों के लिए भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जबकि ट्रैक मेंटेनेंस में लगे गैंगमैन भारी कार्यभार और असुरक्षित परिस्थितियों में काम कर रहे हैं।

एटक ने कहा कि केंद्र सरकार रेलवे, रक्षा और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों में स्वीकृत पदों को खत्म कर युवाओं से रोजगार छीन रही है। संगठन ने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्रालय में भी चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद भर्तियां रोकी जा रही हैं और मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति तक नहीं दी जा रही। एटक ने अग्निपथ योजना को भी ठेका रोजगार करार देते हुए इसका विरोध दोहराया।

एटक ने केंद्र सरकार, रेल मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से स्वीकृत पदों को समाप्त करने का निर्णय तत्काल वापस लेने, सभी रिक्त पदों पर नियमित भर्ती शुरू करने तथा ठेका, आकस्मिक और निश्चित अवधि कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की है। संगठन ने सभी ट्रेड यूनियनों और बेरोजगार युवाओं से सरकार की श्रमिक विरोधी और सार्वजनिक क्षेत्र विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया है।

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