बिजुरी। नगर पालिका बिजुरी का वार्ड क्रमांक 15 इन दिनों बदहाल व्यवस्था, प्रशासनिक लापरवाही और जनसुविधाओं की खुली पोल का जीवंत उदाहरण बन चुका है। हालात इतने भयावह हैं कि स्थानीय लोग अब अपने ही वार्ड को “नरक” कहने लगे हैं। चारों ओर गंदगी का अंबार, बजबजाती नालियां, सड़कों पर बहता बदबूदार पानी और पीने के पानी के लिए जूझती जनता—यह दृश्य किसी उपेक्षित बस्ती का नहीं, बल्कि नगर पालिका क्षेत्र के एक वार्ड का है।
सबसे गंभीर बात यह है कि वार्ड की इस बदहाली से नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह बेखबर नहीं, बल्कि शिकायतों के बावजूद बेपरवाह बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वार्ड की समस्याओं को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, ज्ञापन दिए गए, मौखिक रूप से जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन का झुनझुना थमा दिया गया। न नालियों की सफाई हुई, न गंदगी हटाई गई, न पेयजल संकट दूर हुआ। इससे अब लोगों का गुस्सा खुलकर फूटने लगा है।
नालियों में सड़ रही व्यवस्था, सड़कों पर बह रही लापरवाही
वार्ड क्रमांक 15 में वर्षों से नालियों की समुचित सफाई नहीं हुई। नतीजा यह है कि अधिकांश नालियां पूरी तरह जाम हो चुकी हैं। गंदा पानी ओवरफ्लो होकर गलियों और सड़कों पर बह रहा है। कई स्थानों पर नालियों का कचरा सड़कों के किनारे सड़ रहा है, जिससे पूरे इलाके में असहनीय दुर्गंध फैली हुई है।
हालात यह हैं कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चों को गंदगी के बीच स्कूल जाना पड़ रहा है, बुजुर्ग बदबू और मच्छरों के बीच दिन काटने को मजबूर हैं। वार्ड के कई हिस्सों में गंदे पानी के जमाव ने बीमारी फैलने का खतरा बढ़ा दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द सफाई नहीं हुई तो संक्रामक बीमारियां फैलना तय है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे नगर पालिका प्रशासन की होगी।
जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर सफाई के नाम पर हर महीने खर्च होने वाला बजट कहां जा रहा है? यदि सफाई कर्मी तैनात हैं तो वार्ड की नालियां वर्षों से जाम क्यों हैं? यदि सफाई अभियान चल रहे हैं तो जमीन पर गंदगी के ढेर क्यों खड़े हैं? ये सवाल अब सिर्फ वार्ड 15 के नहीं, पूरे नगर पालिका तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर आरोप बन चुके हैं।
कागजों में विकास, जमीन पर सूखा: पेयजल व्यवस्था की खुली पोल
वार्ड 15 में पेयजल संकट ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पेयजल समस्या दूर करने के नाम पर वार्ड में एक बोरवेल कराया गया। नगर पालिका ने कागजों में इसकी गहराई 240 फीट दर्ज कर दी, लेकिन क्षेत्रवासियों का आरोप है कि वास्तविकता में बोर मुश्किल से 150 फीट ही कराया गया।
यही नहीं, जो बोरवेल कराया गया, वह भी अब बंद पड़ा है। न उसमें से पानी मिल रहा है, न उसकी कोई मरम्मत हुई। यानी जनता को राहत देने के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर दी गई। समस्या जस की तस बनी रही, लेकिन फाइलों में काम पूरा दिखा दिया गया।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि विकास कार्यों के नाम पर गंभीर अनियमितता का मामला है। जनता जानना चाहती है कि आखिर 240 फीट का भुगतान किस काम का हुआ? यदि बोरवेल पूरा नहीं हुआ तो जिम्मेदार कौन है? और यदि हुआ, तो फिर पानी क्यों नहीं मिल रहा?
शिकायतें बहुत, कार्रवाई शून्य: जनता का भरोसा टूटा
वार्डवासियों का कहना है कि उन्होंने नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक कई बार शिकायत की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन दिया गया। मौके पर न निरीक्षण हुआ, न सफाई की ठोस व्यवस्था बनी, न पेयजल संकट दूर करने के प्रयास हुए।
अब लोगों का कहना है कि नगर पालिका में सुनवाई नहीं, सिर्फ दिखावा हो रहा है। जनता की बुनियादी समस्याएं जस की तस हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि कुर्सी पर बैठकर सब कुछ सामान्य बताने में लगे हैं। यही कारण है कि अब लोगों का भरोसा प्रशासन से उठता जा रहा है।
वार्ड 15 नहीं, पूरी व्यवस्था पर सवाल
बिजुरी का वार्ड क्रमांक 15 आज केवल एक वार्ड की बदहाली की कहानी नहीं, बल्कि पूरे नगर पालिका तंत्र की कार्यप्रणाली पर लगा गंभीर प्रश्नचिह्न बन चुका है। यह मामला केवल गंदगी, नाली और पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताता है कि जिम्मेदार तंत्र किस हद तक संवेदनहीन और लापरवाह हो चुका है।
जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है, लेकिन जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठकर कागजों में विकास की इबारत लिख रहे हैं। सवाल सीधा है—जब वार्ड की जनता गंदगी, बदबू और पानी संकट में जी रही है, तब नगर पालिका आखिर कर क्या रही है?
अब जवाब चाहिए, बहाने नहीं
वार्ड 15 की जनता अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहती है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब नालियों की सफाई होगी? कब सड़कों से गंदगी हटेगी? कब पेयजल संकट दूर होगा? और सबसे बड़ा सवाल—विकास के नाम पर हुए कामों की जवाबदेही तय कब होगी?
यदि अब भी नगर पालिका प्रशासन नहीं जागा, तो वार्ड 15 का यह जनाक्रोश आने वाले दिनों में बड़ा जनविरोध बन सकता है। क्योंकि जनता अब चुप नहीं है। जनता सवाल पूछ रही है… और इस बार उसे जवाब चाहिए।
















































