बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बढ़ते संघर्ष और इलाज व्यवस्था पर उठे सवाल स्थानीय स्तर पर वन्यजीव उपचार केंद्र की मांग तेज

---Advertisement---

 

 

कृष्ण कुमार उपाध्याय मानपुर बांधवगढ़ उमरिया

 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के बीच आपसी संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। क्षेत्र में बढ़ती बाघों की संख्या और सीमित क्षेत्रफल के कारण टेरिटरी (क्षेत्र) को लेकर टकराव आम होता जा रहा है। इन संघर्षों में कई बार बाघ गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है।

 

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, घायल बाघों और अन्य वन्यजीवों को उपचार के लिए व्हाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर भेजा जाता है। लेकिन बांधवगढ़ से मुकुंदपुर की दूरी अधिक होने के कारण घायल वन्यजीवों को समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता। लंबी दूरी और परिवहन के दौरान होने वाली देरी कई बार जानलेवा साबित हो रही है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के भीतर ही एक आधुनिक वन्यजीव उपचार केंद्र (Wildlife Rescue & Treatment Center) स्थापित किया जाए, तो घायल बाघों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। इससे न केवल मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि अन्य वन्यजीवों—जैसे तेंदुआ, भालू और हिरण—को भी समय पर उपचार मिल पाएगा।

 

स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बांधवगढ़ जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व में इस तरह की मूलभूत सुविधा का अभाव होना चिंता का विषय है। उन्होंने शासन और वन विभाग से मांग की है कि यहां अत्याधुनिक उपकरणों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और 24×7 सुविधा वाले उपचार केंद्र की स्थापना जल्द से जल्द की जाए।

 

यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कई बेशकीमती वन्यजीवों की जान यूं ही जाती रहेगी। वहीं, एक सुसज्जित स्थानीय उपचार केंद्र बनने से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल भी कायम कर सकता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

April 25, 2026

April 25, 2026

April 25, 2026

April 25, 2026

April 25, 2026

April 25, 2026

Leave a Comment