चार हिस्सों में बंटे पांच हाथियों का आतंक, अनूपपुर के ग्रामीण दहशत में

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कोयलांचल समाचार | रिपोर्टर शशिधर अग्रवाल

अनूपपुर, 25 अप्रैल। अनूपपुर जिले में इन दिनों पांच जंगली हाथियों का आतंक ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता और भय का कारण बन गया है। छत्तीसगढ़ सीमा से पहुंचे पांच हाथी अब चार अलग-अलग हिस्सों में बंटकर अनूपपुर और जैतहरी क्षेत्र के जंगलों तथा ग्रामीण इलाकों में लगातार विचरण कर रहे हैं। दिन में जंगलों में डेरा डालने वाले ये हाथी शाम ढलते ही भोजन की तलाश में गांवों की ओर रुख कर रहे हैं और खेत, बाड़ी तथा मकानों में घुसकर भारी तबाही मचा रहे हैं। हाथियों की इस गतिविधि ने प्रभावित गांवों के ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।

 

हाथियों के लगातार गांवों में पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। भोजन की तलाश में ये हाथी खेतों में लगी फसलों को नष्ट कर रहे हैं, घरों में घुसकर तोड़फोड़ कर रहे हैं और ग्रामीणों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि कई गांवों में लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। हाथियों को गांव से भगाने की कोशिश करने पर कई बार हाथी ग्रामीणों पर आक्रमण करने का प्रयास भी कर चुके हैं, जिससे भय और अधिक बढ़ गया है।

 

जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से आए पांच हाथियों का दल अनूपपुर जिले में प्रवेश करने के बाद अब तीन, एक और एक की संख्या में अलग-अलग हिस्सों में बंट गया है। ये हाथी अनूपपुर और जैतहरी क्षेत्र के जंगलों में दिनभर विश्राम करते हैं और रात होते ही जंगल से लगे गांवों में पहुंचकर उत्पात मचाते हैं।

 

सबसे अधिक दहशत जिला मुख्यालय अनूपपुर से करीब 7 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत खांड़ा में देखी जा रही है। यहां एक दंतैल नर हाथी पिछले 16 दिनों से खांड़ा बांध के ऊपर स्थित जंगल में डेरा जमाए हुए है। यह हाथी रात होते ही पहाड़ी से उतरकर पहले खांड़ा बांध में पानी पीने और नहाने पहुंचता है, फिर गांव की ओर बढ़ जाता है।

 

इस हाथी ने ग्राम खांड़ा निवासी मोहन उर्फ ललऊ पिता स्वर्गीय शिवमंगल सिंह गोंड के कच्चे मकान को लगातार छह दिनों तक निशाना बनाते हुए पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। ग्रामीण मोहन ने अपने मकान को बचाने के लिए घर के चारों ओर बैर, बबूल और अन्य कंटीली डालियां लगा दी थीं, लेकिन हाथी ने उन्हें हटाकर फिर मकान में घुसकर तोड़फोड़ कर दी। यही नहीं, पड़ोसी बहोरी सिंह पिता स्वर्गीय गोरेलाल सिंह के कच्चे मकान को भी हाथी तीन बार नुकसान पहुंचा चुका है। साथ ही उनकी बाड़ी में लगे कटहल और बांस के पेड़ों को भी तोड़कर खा गया।

 

ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की गश्ती टीम के साथ मिलकर कई बार इस हाथी को गांव से दूर भगाने का प्रयास किया गया, लेकिन हाथी कुछ दूर जाकर फिर चिघाड़ते हुए लौट आता है और हमला करने की मुद्रा में खड़ा हो जाता है। रातभर हाथी की इस गतिविधि से ग्रामीणों की नींद उड़ गई है।

 

उधर जैतहरी क्षेत्र में भी हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। एक अन्य दंतैल हाथी, जो एक सप्ताह पहले छत्तीसगढ़ सीमा पार कर जैतहरी तहसील के कुकुरगोंड़ा, पड़रिया और क्योटार के जंगलों में पहुंचा था, वह अपने तीन साथियों के साथ कई दिनों तक जंगल में रुका रहा। शुरुआती तीन दिनों तक चारों हाथी जंगल के भीतर ही पेड़-पौधों को खाकर विचरण करते रहे, लेकिन शुक्रवार रात ये हाथी अलग-अलग दिशा में बंट गए।

 

इनमें से एक हाथी कुकुरगोंड़ा पंचायत के सरईहा टोला पहुंचा, जहां उसने एक घर में तोड़फोड़ की। वहीं एक अन्य दंतैल हाथी क्योटार पंचायत के कुसुमहाई गांव पहुंचा और पाड़ाडोल निवासी देवलाल पिता बाबूलाल बैगा के घर को 11वीं बार तोड़ डाला। इसके बाद हाथी ने कुसुमहाई के पटौरा निवासी सीताराम राठौर के खेत में लगी गर्मी की धान की फसल को रौंद डाला और बगीचाटोला निवासी अंबिका सिंह के खेत में रखे सिंचाई पंप तथा केले के पेड़ों को नष्ट कर दिया।

 

शनिवार सुबह यह हाथी पुनः कुकुरगोंड़ा पंचायत से लगे जंगल में लौट गया और वहां विश्राम करता देखा गया। वहीं दो अन्य हाथी रातभर जंगल से बाहर नहीं निकले और शनिवार सुबह धनगवां वन बीट के सोननदी एवं संतोकनाला के मध्य जंगल में विश्राम करते पाए गए।

 

हाथियों की इस लगातार आवाजाही और रात के समय ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे नुकसान से हाथी प्रभावित गांवों के लोग भयभीत और परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के कारण खेती, मकान और जनजीवन सभी प्रभावित हो रहे हैं। लोग रातभर जागने को मजबूर हैं और बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

 

वन विभाग की ओर से अलग-अलग गश्ती दल गठित कर हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग ग्रामीणों को सतर्क रहने, रात में अकेले बाहर न निकलने तथा हाथियों के नजदीक न जाने की लगातार चेतावनी दे रहा है। बावजूद इसके हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा, जिससे ग्रामीणों में दहशत और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है।

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