बदरा तिराहे पर फ्लाई ऐश वाहन की टक्कर से महिला की दर्दनाक मौत

जमुना कोतमा 20 सितंबर की शाम बदरा तिराहे पर एचआरसी कंपनी के वाहन क्रमांक MP 65 Z 8202 की टक्कर से ग्राम पसला निवासी इंद्रवती यादव (30), पति रामकुमार यादव की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वाहन हिंदुस्तान पावर जैतहरी से फ्लाई ऐश लेकर आ रहा था हादसे के बाद महिला की मौत से क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है घटना के बाद 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और महिला को ले जाया गया इस घटना ने फ्लाई ऐश परिवहन में लगे भारी वाहनों की गति, सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार कंपनी की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते, तो क्या इस तरह की दुर्घटना को रोका जा सकता था? मामले में पुलिस की जांच और वाहन चालक के विरुद्ध कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है
केवई नदी पुल पर मवेशियों को कुचलने की घटना, भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया चक्काजाम
महिला की मौत के अगले ही दिन 21 सितंबर की सुबह भालूमाड़ा स्थित केवई नदी पुल पर फ्लाई ऐश परिवहन में लगे एचआरसी कंपनी के वाहन से मवेशियों के कुचलने की घटना सामने आई हादसे में दो मवेशियों के घायल होने की जानकारी है घटना के बाद वाहन मौके से फरार हो गया, जबकि घायल मवेशी सड़क पर पड़े रहे इसकी जानकारी मिलते ही भाजपा मंडल पसान के कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और केवई नदी पुल पर चक्काजाम कर दिया
भाजपा मंडल अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह, भाजपा जिला मीडिया प्रभारी राजेश सिंह, अभिषेक सिंह, विक्की, सौरभ सिंह, अजय यादव, सचिन जायसवाल, अमीन अहमद, भारत मंगोलिया, सोनू सिंह, बाहुबली सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने वाहन चालक और संबंधित कंपनी के जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई, घायल मवेशियों के उपचार तथा प्रभावित पशु मालिकों को उचित मुआवजा देने की मांग की प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फ्लाई ऐश परिवहन में लगे वाहनों की लापरवाही पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं होती रहेंगी मौके पर पुलिस अधिकारी मौजूद रहे और स्थिति पर नजर बनाए रखी
सड़क पर उड़ती फ्लाई ऐश की धूल, लोगों के स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
फ्लाई ऐश परिवहन के दौरान सड़क पर उड़ती धूल भी स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है क्षेत्रवासियों का आरोप है कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के बावजूद सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं किया जाता एक साथ कई-कई वाहनों के गुजरने से धूल का गुबार उठता है, जिससे राहगीरों, दुकानदारों, वाहन चालकों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है
फ्लाई ऐश में मौजूद महीन कण हवा में फैलकर सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं लंबे समय तक धूल के संपर्क में रहने से खांसी, गले में जलन, सांस लेने में परेशानी और अस्थमा जैसी श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं धूल के संपर्क से आंखों में जलन और त्वचा में परेशानी भी हो सकती है। यदि धूल में सिलिका जैसे हानिकारक कण मौजूद हों, तो लंबे समय तक अधिक संपर्क फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है
हालांकि, क्षेत्र में किन बीमारियों के कितने मामले फ्लाई ऐश के कारण हो रहे हैं, इसका निर्धारण स्वास्थ्य विभाग की जांच, पर्यावरणीय निगरानी और चिकित्सकीय आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकता है इसके बावजूद धूल नियंत्रण के इंतजामों की कमी और लगातार भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
फ्लाई ऐश परिवहन में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाई ऐश से भरे वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़क पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है कई बार भारी वाहनों के एक साथ गुजरने और धूल उड़ने से सामने से आने वाले वाहन तथा पैदल चलने वाले लोग भी परेशान होते हैं ऐसे में वाहनों की गति नियंत्रित करना, निर्धारित मार्ग और समय का पालन कराना, वाहनों को सुरक्षित तरीके से ढककर चलाना तथा सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव कराना जरूरी है
लोगों का सवाल है कि जब एक ही परिवहन व्यवस्था से जुड़े वाहनों के कारण लगातार दुर्घटनाओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो संबंधित कंपनी और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के ठोस इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे? क्या परिवहन मार्ग पर नियमित निगरानी की व्यवस्था है? क्या वाहनों की गति और उनकी संख्या पर नियंत्रण किया जा रहा है? यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो संबंधित कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?
ओसीएम भराव में फ्लाई ऐश की जरूरत पर भी सवाल
क्षेत्र में फ्लाई ऐश के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि ओपनकास्ट माइंस (ओसीएम) के भराव के लिए फ्लाई ऐश की आवश्यकता नहीं है और वहां मौजूद टीलेनुमा मिट्टी को समतल कर भराव किया जा सकता है ऐसे में सवाल उठता है कि फ्लाई ऐश का परिवहन किस उद्देश्य से किया जा रहा है, इसका उपयोग कहां और किन तकनीकी मानकों के आधार पर किया जा रहा है?
यदि ओसीएम में फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा रहा है, तो संबंधित परियोजना की स्वीकृति, पर्यावरणीय शर्तों, तकनीकी आवश्यकता और परिवहन पर होने वाले खर्च की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि फ्लाई ऐश के उपयोग से वास्तविक लाभ कितना हो रहा है और उसके परिवहन, धूल नियंत्रण तथा पर्यावरणीय सुरक्षा पर कितना खर्च किया जा रहा है
बिना तकनीकी जांच के यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि फ्लाई ऐश की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है या इसका परिवहन पूरी तरह अनावश्यक है लेकिन यदि स्थानीय लोगों की आशंकाएं सही हैं, तो संबंधित विभागों को परियोजना की आवश्यकता और खर्च का पारदर्शी विवरण प्रस्तुत करना चाहिए
कमीशनखोरी के आरोपों के बीच जवाबदेही की मांग
क्षेत्र में फ्लाई ऐश परिवहन को लेकर कुछ लोगों द्वारा जिम्मेदारों के कमीशन तय होने जैसे आरोप भी लगाए जा रहे हैं हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में कोई प्रमाण सामने आया है ऐसे आरोपों की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर की जानी चाहिए
लेकिन महिला की मौत और मवेशियों के घायल होने जैसी घटनाओं के बाद यह सवाल जरूर उठता है कि परिवहन व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है और दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या संबंधित कंपनी के वाहनों की नियमित जांच होती है? क्या सड़क पर धूल नियंत्रण के लिए निर्धारित नियमों का पालन कराया जा रहा है? और क्या दुर्घटना के बाद पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता तथा मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा?
प्रशासन से उठ रही कार्रवाई की मांग
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद क्षेत्रवासियों की मांग है कि फ्लाई ऐश परिवहन में लगे वाहनों की गति पर नियंत्रण किया जाए, वाहनों को निर्धारित मार्ग और समय के अनुसार चलाया जाए तथा सड़क पर धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए दुर्घटना में शामिल वाहनों और चालकों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए साथ ही घायल मवेशियों का उपचार और प्रभावित पशु मालिकों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाए
महिला की मौत के मामले में भी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है लोगों का कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों और परिवहन के नाम पर आम नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बदरा तिराहे पर महिला की मौत और केवई नदी पुल पर मवेशियों के घायल होने के बाद प्रशासन कब ठोस कदम उठाएगा? क्या फ्लाई ऐश परिवहन की व्यवस्था में सुधार होगा या क्षेत्रवासियों को धूल, दुर्घटनाओं और असुरक्षा के बीच ही जीवन गुजारना पड़ेगा? फिलहाल स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासन, पुलिस, आबकारी नहीं बल्कि संबंधित औद्योगिक एवं परिवहन प्रबंधन और जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई पर टिकी हैं
इनका कहना है
केवई नदी पुल पर मवेशियों के साथ हुई दुर्घटना पर शिकायत पर अज्ञात वाहनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और जांच के दौरान दो कोयले से भरे और दो राखड़ से भरे ट्रैकों पर चालानी कार्यवाही की गई है। सुचारू आवागवन के लिए भी पुलिस द्वारा निगरानी की जाएगी जिससे इस प्रकार की घटनाएं न हो
राधिका भगत थाना प्रभारी भालूमाडा


































































