विश्व आदिवासी दिवस पर धार में गूंजा आदिवासी संस्कृति का संदेश, हजारों समाजजनों ने निकाली भव्य रैली

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विश्व आदिवासी दिवस पर धार में गूंजा आदिवासी संस्कृति का संदेश, हजारों समाजजनों ने निकाली भव्य रैली

ब्यूरो रिपोर्ट शैलेंद्र जोशी

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को धार शहर में आदिवासी समाज की ओर से विशाल सांस्कृतिक रैली निकाली गई। रैली में धार शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता की झलक देखने को मिली।

रैली की शुरुआत किला ग्राउंड से हुई। यहां सुबह से ही समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होने लगे थे। इसके बाद रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी। घोड़ा चौपाटी, मोहन टॉकीज सहित विभिन्न मार्गों से गुजरने के दौरान जगह-जगह लोगों ने रैली का स्वागत किया।

रैली में युवाओं की खास भागीदारी रही। बड़ी संख्या में युवा पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। कई युवाओं के हाथों में तीर-कमान थे, जबकि समाजजन पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ रैली में शामिल हुए। पारंपरिक धुनों के साथ युवाओं ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया। आयोजन में डीजे की धुन भी सुनाई दी, जिससे माहौल उत्सवमय बना रहा।

रैली में विभिन्न प्रकार के सुसज्जित रथ भी आकर्षण का केंद्र रहे। इन रथों पर संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर और आदिवासी जननायक टंट्या मामा सहित समाज के महापुरुषों के चित्र लगाए गए थे। रैली के दौरान महापुरुषों के जयकारों से शहर का माहौल गूंजता रहा।

पारंपरिक परिधानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समाजजनों ने अपनी समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ समाज में एकता और जागरूकता का संदेश देना रहा।

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विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को धार शहर में आदिवासी समाज की ओर से विशाल सांस्कृतिक रैली निकाली गई। रैली में धार शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता की झलक देखने को मिली।

 

रैली की शुरुआत किला ग्राउंड से हुई। यहां सुबह से ही समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होने लगे थे। इसके बाद रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी। घोड़ा चौपाटी, मोहन टॉकीज सहित विभिन्न मार्गों से गुजरने के दौरान जगह-जगह लोगों ने रैली का स्वागत किया।

 

रैली में युवाओं की खास भागीदारी रही। बड़ी संख्या में युवा पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। कई युवाओं के हाथों में तीर-कमान थे, जबकि समाजजन पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ रैली में शामिल हुए। पारंपरिक धुनों के साथ युवाओं ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया। आयोजन में डीजे की धुन भी सुनाई दी, जिससे माहौल उत्सवमय बना रहा।

 

रैली में विभिन्न प्रकार के सुसज्जित रथ भी आकर्षण का केंद्र रहे। इन रथों पर संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर और आदिवासी जननायक टंट्या मामा सहित समाज के महापुरुषों के चित्र लगाए गए थे। रैली के दौरान महापुरुषों के जयकारों से शहर का माहौल गूंजता रहा।

 

पारंपरिक परिधानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समाजजनों ने अपनी समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ समाज में एकता और जागरूकता का संदेश देना रहा।

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