कोयलांचल समाचार | रिपोर्टर : शशिधर अग्रवाल
अनूपपुर। भीषण गर्मी और जंगलों में लगातार घटते जलस्रोत अब वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। अनूपपुर वन परिक्षेत्र में बीते तीन दिनों के भीतर वन्यजीवों से जुड़ी तीन अलग-अलग घटनाओं ने वन विभाग के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर पानी की तलाश में जंगल से गांव पहुंचे दो नर चीतलों की आवारा कुत्तों के हमले में मौत हो गई, वहीं बीमार हालत में मिले विलुप्तप्राय भारतीय गिद्ध ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। राहत की बात यह रही कि घायल और बीमार हालत में मिला चील पक्षी चार दिन के उपचार के बाद स्वस्थ हो गया, जिसे वन विभाग एवं वन्यजीव संरक्षकों ने सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।
जानकारी के अनुसार अनूपपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत खुटवा बीट के ग्राम पटनाकला में बीते दो दिनों के भीतर दो नर चीतल जंगल से पानी की तलाश में गांव की ओर पहुंच गए थे। बताया गया कि पड़ोसी शहडोल जिले के बुढार वन क्षेत्र से भटककर आए ये चीतल रात के समय गांव के तालाबों की ओर पानी पीने पहुंचे थे। इसी दौरान गांव में घूम रहे आवारा कुत्तों ने उन पर हमला कर दिया। कुत्तों के झुंड ने दोनों चीतलों को दौड़ाकर गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही खुटवा बीट के वनरक्षक शिवकुमार तिवारी मौके पर पहुंचे और दोनों मृत चीतलों के शव को अपने कब्जे में लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। वन विभाग ने पंचनामा और आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
वन अमले के अनुसार गर्मी के कारण जंगलों के प्राकृतिक जलस्रोत तेजी से सूख रहे हैं, जिससे जंगली जानवर पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे वन्यजीवों पर हमले और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका लगातार बढ़ रही है।
इसी बीच 29 अप्रैल की सुबह खुटवा वन बीट अंतर्गत संजयनगर कॉलोनी के सकोला क्षेत्र में एक वयस्क भारतीय गिद्ध बीमार हालत में मिला था। यह गिद्ध विलुप्तप्राय श्रेणी का माना जाता है। सूचना मिलने पर वन विभाग ने पशु चिकित्सकों की मदद से उसका उपचार शुरू कराया और उसे खुटवा वन चौकी में निगरानी में रखा गया। लगातार चार दिनों तक उपचार के बावजूद गिद्ध की हालत में सुधार नहीं हुआ और अंततः उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक पोस्टमार्टम में पशु चिकित्सकों ने आशंका जताई कि गिद्ध ने संभवतः किसी जहरीले पदार्थ का सेवन किया था, जिससे उसकी हालत बिगड़ी। वन विभाग अब इसकी विस्तृत जांच करा रहा है।
उधर 29 अप्रैल की दोपहर अनूपपुर नगर के वार्ड क्रमांक 11 स्थित रेलवे पानी टंकी के पास एक चील पक्षी घायल और अचेत अवस्था में मिला। स्थानीय निवासी तपोश घोष की सूचना पर वन्यजीव संरक्षक एवं सर्पप्रहरी शशिधर अग्रवाल तथा छोटेलाल यादव मौके पर पहुंचे और चील को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। पशु चिकित्सकों से उपचार और परीक्षण के बाद चील को सुरक्षित स्थान पर निगरानी में रखा गया। चार दिनों तक लगातार उपचार, पानी और भोजन दिए जाने के बाद चील पूरी तरह स्वस्थ हो गई।
स्वस्थ होने पर शनिवार को वन्यजीव संरक्षक शशिधर अग्रवाल, छोटेलाल यादव, मनोज यादव और धर्मेंद्र यादव ने चील को छीरापटपर जंगल क्षेत्र के बकान नदी के समीप स्वतंत्र विचरण के लिए छोड़ दिया। चील के उड़ान भरते ही मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि भीषण गर्मी, जलस्रोतों का सूखना और वन क्षेत्रों में बढ़ता दबाव वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। वन विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती वन्यजीवों के लिए सुरक्षित जल, संरक्षण और बचाव तंत्र को और मजबूत करने की है।















































