तीन दिवसीय पृथ्वी उद्धारक वराह पुराण कथा का समापन हुआ

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हमारे संस्कार तो विचारों से आते हैं – साध्वी महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा गिरी

ब्यूरो रिपोर्ट शैलेंद्र जोशी

धार। सनातन प्रहरी के तत्वावधान में श्रावण मास के अवसर पर तीन दिवसीय पृथ्वी उद्धारक वराह पुराण कथा का विश्राम रविवार को स्थानीय कृषि उपज मंडी प्रांगण धार में हुआ। कथा का वाचन साध्वी महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा गिरी (वर्षा नागर) के मुखारविंद से हो रही थी।

साध्वी महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा गिरी ने कथा प्रसंग में कहा कि भगवान विष्णु के दशावतारों में से तृतीय अवतार श्री वराह अवतार हुआ। यह अवतार भगवान विष्णु ने सत्ययुग में पृथ्वी की रक्षा और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए लिया था। कश्यप ऋषि और दिति के पुत्र हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु दो अत्यंत शक्तिशाली दैत्य थे। ब्रह्मा जी की कठिन तपस्या करके हिरण्याक्ष ने असीम शक्तियां और अजेय रहने का वरदान प्राप्त कर लिया था। वरदान के अहंकार में आकर उसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया। वह देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर चुका था। हिरण्याक्ष की शक्ति इतनी बढ़ गई थी कि उसने माता पृथ्वी (भूदेवी) को चुराकर रसातल (समुद्र की अतल गहराइयों) में छुपा दिया, जिससे पूरी सृष्टि में उथल-पुथल मच गई।

जब भगवान वराह पृथ्वी को लेकर ऊपर आ रहे थे, तब हिरण्याक्ष ने गदा लेकर उन्हें युद्ध के लिए ललकारा। भगवान वराह और हिरण्याक्ष के बीच भीषण गदा युद्ध हुआ। अंततः, भगवान वराह ने अपने सुदर्शन चक्र और गदा के प्रहार से अत्याचारी हिरण्याक्ष का वध कर दिया। हिरण्याक्ष का अंत करने के बाद, भगवान वराह ने माता पृथ्वी को समुद्र के जल के ऊपर पुनः उसके स्थान पर स्थापित किया। उन्होंने पृथ्वी को स्थिर किया ताकि उस पर पुनः जीवन, वनस्पति और मानव जाति फल-फूल सके।

कथा समापन पर मुख्य यजमान सत्यनारायण रघुवंशी व सनातन प्रहरी के संयोजक जगदीश जाट समिति सदस्यों के साथ पंडित गोटू शुक्ला राजेंद्र शर्मा आशीष बसु अंशुल शर्मा रतन गिरी गोस्वामी पत्रकार संजय शर्मा साध्वीजी का स्वागत कर व्यासपीठ का पूजन कर महाआरती में बढ़ी संख्या में मातृशक्ति अन्य श्रद्धालु उपस्थितर है

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