सुखंदा में 16 घंटे से बिजली गुल, आखिर जनता की सुनवाई कब? भारी-भरकम बिल के बावजूद अंधेरे में ग्रामीण
विद्युत विभाग के जिम्मेदारों के फोन बंद नहीं, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने से शिकायतें बेअसर; मच्छरों के प्रकोप से बढ़ी परेशानी
मंत्री दिलीप जायसवाल और विधायक विशाल लाल सिंह से सवाल—ग्रामीणों को नियमित बिजली दिलाने के लिए कब होगा हस्तक्षेप?
अनूपपुर। बदरा ग्राम पंचायत के सुखंदा क्षेत्र में बिजली की आंख-मिचौली ने आमजन का जीना मुश्किल कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में करीब 16 घंटे से विद्युत आपूर्ति बाधित है। लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं, दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहे हैं और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप ने परेशानी और बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लोगों को घंटों बिजली नहीं मिलती और शिकायत करने पर भी सुनवाई नहीं होती, तो आखिर उनकी समस्या का समाधान कौन करेगा?
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों को फोन लगाने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं किए जा रहे हैं। बिजली जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। यदि किसी तकनीकी खराबी के कारण आपूर्ति बंद है, तो विभाग की जिम्मेदारी है कि खराबी का पता लगाकर उसे जल्द ठीक कराया जाए और उपभोक्ताओं को स्थिति की जानकारी दी जाए।
बिल भरपूर, बिजली के लिए इंतजार क्यों?
ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि बिजली के बिल भारी-भरकम आते हैं, लेकिन नियमित आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। बिल जमा करने में देरी होने पर कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन घंटों बिजली गुल रहने पर जवाबदेही किसकी होगी? उपभोक्ता समय पर बिल चुकाने की जिम्मेदारी निभाएं, तो विभाग को भी निर्बाध और निर्धारित मानकों के अनुरूप बिजली आपूर्ति तथा शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
क्या अधिकारियों तक नहीं पहुंच रही ग्रामीणों की परेशानी?
सुखंदा क्षेत्र में करीब 16 घंटे तक बिजली बंद रहने की शिकायत ने विद्युत विभाग की व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल एक बार की नहीं, बल्कि आए दिन बिजली गुल रहने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। कभी-कभार बड़े फॉल्ट के कारण आपूर्ति बाधित होना अलग बात है, लेकिन बार-बार घंटों बिजली बंद रहने और शिकायतों पर प्रतिक्रिया नहीं मिलने से लोगों का भरोसा कमजोर होता है।
यदि विभाग को खराबी की जानकारी है, तो उसे सुधारने में देरी क्यों हो रही है? और यदि शिकायतें अधिकारियों तक पहुंच ही नहीं रही हैं, तो उपभोक्ताओं की समस्याएं सुनी कैसे जाएंगी? इन सवालों का जवाब विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
मंत्री और विधायक से ग्रामीणों की उम्मीद
ग्रामीणों ने प्रदेश के मंत्री दिलीप जायसवाल और क्षेत्रीय विधायक विशाहु लाल सिंह से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों की अपेक्षा है कि जनप्रतिनिधि विद्युत विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब करें, बिजली बंद रहने के कारणों की जानकारी लें और क्षेत्र में नियमित आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक निर्देश दें।
अब सवाल सिर्फ 16 घंटे की बिजली कटौती का नहीं, बल्कि जवाबदेही का है। जब आमजन बिजली के बिल का भुगतान करते हैं, तो उन्हें समय पर बिजली और शिकायत करने पर सुनवाई मिलने की अपेक्षा भी रहती है। बदरा ग्राम पंचायत के सुखंदा क्षेत्र के ग्रामीणों को आश्वासन नहीं, समस्या का समाधान चाहिए।
विद्युत विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने अब यह सवाल है कि ग्रामीणों को इस परेशानी से राहत कब मिलेगी? संबंधित अधिकारियों की ओर से बिजली बंद रहने के कारण और आपूर्ति बहाल करने के संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है






































































