शहडोल: ग्राम सिंदुरी में संचालित अल्ट्राटेक कोल माइंस पर स्थानीयों और कर्मचारियों के गंभीर आरोप, न्याय की मांग तेज।

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शहडोल:

ग्राम सिंदुरी में संचालित अल्ट्राटेक कोल माइंस पर स्थानीयों और कर्मचारियों के गंभीर आरोप, न्याय की मांग तेज।

शहडोल। जिले की ग्राम पंचायत सिंदुरी में संचालित अल्ट्राटेक कोल माइंस प्रबंधन एक बार फिर स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के आरोपों के चलते विवादों में घिरता नजर आ रहा है।
भूमि प्रभावित परिवारों, श्रमिकों और ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर शोषण, वेतन कटौती, सीएसआर कार्यों में लापरवाही तथा शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
मामले को लेकर प्रभावित लोगों ने शासन और प्रशासन से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों ने उद्योग स्थापना के लिए अपनी जमीनें दी थीं, उन्हें रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था। कंपनी ने कुछ लोगों को नौकरी तो दी, लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि उनके वेतन से विभिन्न मदों के नाम पर कटौती की जा रही है, जिससे उन्हें निर्धारित वेतन का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से इस समस्या को लेकर प्रबंधन के समक्ष अपनी बात रखते रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों का कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।

इसके अलावा ग्रामीणों ने कंपनी के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) कार्यों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि कंपनी द्वारा गांव के विकास के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर अपेक्षित स्तर पर खर्च नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी प्राकृतिक संपदाओं का दोहन कर कंपनी करोड़ों का कारोबार कर रही है, लेकिन प्रभावित क्षेत्र के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

वहीं, अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे श्रमिकों ने भी प्रबंधन पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। श्रमिकों के अनुसार उन्हें स्पीड पोस्ट के माध्यम से नोटिस और पत्र भेजे गए हैं, जिनमें आंदोलन समाप्त नहीं करने पर नौकरी से हटाने तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना उनका अधिकार है और इस तरह की कार्रवाई श्रमिकों की आवाज दबाने का प्रयास प्रतीत होती है।

ग्रामीणों और कर्मचारियों का आरोप है कि उद्योग स्थापना के समय क्षेत्र के विकास और रोजगार के जो सपने दिखाए गए थे, वे अब अधूरे साबित हो रहे हैं। उनका कहना है कि रोजगार, सम्मानजनक वेतन, सामाजिक विकास और मूलभूत सुविधाओं की मांग करना कोई अपराध नहीं है। प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन, श्रम विभाग तथा राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और श्रमिकों तथा स्थानीय लोगों को न्याय दिलाने की मांग की है।

फिलहाल इस पूरे मामले में कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देने पर विचार करेंगे। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच पर टिकी हुई हैं कि प्रभावित लोगों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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