सीसीएल ने रचा नया इतिहास, पिपरवार में शुरू हुआ ‘कोल नीर प्लांट’

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सीसीएल ने रचा नया इतिहास, पिपरवार में शुरू हुआ ‘कोल नीर प्लांट’

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने किया वर्चुअल उद्घाटन, खदान के पानी से मिलेगा शुद्ध पेयजल, महिलाओं को मिलेगा रोजगार

रांची/पिपरवार, 22 जुलाई। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) ने खनन क्षेत्र में जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पिपरवार क्षेत्र के बचरा में स्थापित अत्याधुनिक ‘कोल नीर प्लांट’ का शुभारंभ कर दिया। इस प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नई दिल्ली से किया। कार्यक्रम में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, अपर सचिव रूपिंदर बरार, कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन बी. साई राम, सीसीएल के सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह सहित कोल इंडिया की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों के सीएमडी एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि ‘कोल नीर’ केवल एक जल शोधन परियोजना नहीं, बल्कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर जल’ संकल्प को साकार करने की दिशा में एक अभिनव पहल है। उन्होंने कहा कि खदानों से निकलने वाले पानी का वैज्ञानिक ढंग से शोधन कर उसे जनकल्याण, विकास और आजीविका का माध्यम बनाया जा रहा है। उन्होंने माइन क्लोजर की वैज्ञानिक प्रक्रिया पर भी जोर देते हुए कहा कि पुनर्वासित खनन क्षेत्रों को इको पार्क, हरित क्षेत्र और सामुदायिक उपयोग के लिए विकसित किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों की भागीदारी दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की श्रेणी में पहुंचना है, तो नवाचार और संसाधनों के संरक्षण को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग ही सतत विकास का आधार है और ‘कोल नीर’ जैसी परियोजनाएं इसी सोच का परिणाम हैं।

कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि यह पहल केवल स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का भी माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं अब धरातल पर दिखाई दे रही हैं और उनका सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुंच रहा है।

कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि ‘कोल नीर’ पहल के माध्यम से खदानों के पानी का सतत एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा और स्थानीय समुदायों के लिए दीर्घकालिक लाभ के नए अवसर तैयार होंगे।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ‘आरोह (AAROH – The Rising)’ माइन क्लोजर पर आधारित वार्षिक रिपोर्ट का भी लोकार्पण किया। साथ ही सीसीएल द्वारा तैयार किए गए माइन क्लोजर मॉडल का उद्घाटन कर उसके विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली।

पिपरवार क्षेत्र में आयोजित समारोह में सीसीएल के निदेशक (वित्त) पवन कुमार मिश्रा, निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र, निदेशक (तकनीकी/संचालन) चंद्र शेखर तिवारी, निदेशक (योजना एवं परियोजना) अनूप हंजूरा, पिपरवार क्षेत्र के महाप्रबंधक सुजीत कुमार, विभिन्न क्षेत्रों के महाप्रबंधक, अधिकारी, कर्मचारी, श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

अत्याधुनिक तकनीक से लैस है प्लांट

पिपरवार के बचरा में स्थापित यह कोल नीर प्लांट प्रतिदिन 25 किलोलीटर पानी शुद्ध करने की क्षमता रखता है। आधुनिक मशीनों की सहायता से यहां 500 मिलीलीटर और 1 लीटर की 40 बोतल प्रति मिनट भरने की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा 20 लीटर के जार भी तैयार किए जा सकेंगे, जिससे स्थानीय क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

महिलाओं के हाथों में होगी संचालन की जिम्मेदारी

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरा प्लांट स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं द्वारा संचालित किया जाएगा। सीसीएल ने इसके लिए महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया है। इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिलेगी, वहीं क्षेत्र के लोगों को गुणवत्तापूर्ण एवं शुद्ध पेयजल की नियमित सुविधा उपलब्ध होगी।

‘कोल नीर’ परियोजना खनन क्षेत्र में जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य खनन क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत साबित हो सकता है।

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