रातभर चार हाथियों का आतंक, मकान तोड़े, फसलें रौंदी; ग्रामीणों ने वन विभाग के गश्ती दल पर लगाए गंभीर आरोप

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रातभर चार हाथियों का आतंक, मकान तोड़े, फसलें रौंदी; ग्रामीणों ने वन विभाग के गश्ती दल पर लगाए गंभीर आरोप

कोयलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर : शशिधर अग्रवाल

अनूपपुर। जिले के वन परिक्षेत्र अनूपपुर से लगे पगना एवं बेलिया गांव में शुक्रवार देर रात चार जंगली हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने कई ग्रामीणों के कच्चे मकानों में तोड़फोड़ करने के साथ खेतों और बाड़ियों में लगी फसल एवं सब्जियों को नुकसान पहुंचाया। पूरी रात दहशत के साये में गुजारने वाले ग्रामीणों ने वन विभाग के गश्ती दल पर समय पर सूचना नहीं देने तथा मौके पर पहुंचने के बावजूद हाथियों से काफी दूर रहकर केवल तमाशा देखने का गंभीर आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार हाथियों का दल शुक्रवार दिनभर जैतहरी थाना क्षेत्र के गोबरी वन बीट के झुरहीतलैया जंगल में रुका रहा। शाम ढलते ही दल शक्तिकुंडी जंगल होते हुए ग्राम पंचायत पगना के जल्दाटोला और बेलियाकछरा पहुंचा। इसके बाद हाथियों ने तिपान नदी पार कर ग्राम पंचायत छुलहा के बेलिया गांव में प्रवेश कर कई घरों और खेतों में नुकसान पहुंचाया।

हाथियों ने संग्राम कोल, प्रफूल्य महता, महेश कोल, सुरेश प्रसाद कोल एवं सुकांति कोल सहित कई ग्रामीणों के घरों में तोड़फोड़ की। साथ ही खेतों और बाड़ियों में लगी धान, सब्जी तथा अन्य फसलों को अपना आहार बना लिया। ग्रामीणों के अनुसार हाथियों के अचानक गांव पहुंचने से लोग पूरी रात घरों में दुबके रहे और भय के कारण बाहर नहीं निकल सके।

ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की लगातार निगरानी कर रहे वन विभाग के गश्ती दल ने समय रहते गांव में किसी प्रकार की चेतावनी नहीं दी। सूचना मिलने के काफी देर बाद गश्ती दल मौके पर पहुंचा, लेकिन एक-दो कर्मचारियों को छोड़ अधिकांश अधिकारी एवं कर्मचारी हाथियों से काफी दूरी पर खड़े रहे और नुकसान होते देखते रहे। इससे ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी व्याप्त है।

शनिवार सुबह हाथियों का दल पुनः शक्तिकुंडी एवं झुरहीतलैया के जंगल में लौटकर विश्राम करने लगा। इधर घटना की जानकारी मिलने पर अनूपपुर तहसीलदार वेद प्रकाश सिंह, हल्का पटवारी प्रियंका सोनी तथा अन्य अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का दौरा कर क्षति का निरीक्षण किया। तहसीलदार ने प्रभावित परिवारों को आश्वस्त किया कि तत्काल राहत प्रकरण तैयार कर शीघ्र मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

ग्रामीणों ने प्रशासन एवं वन विभाग से मांग की है कि हाथियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जाए, समय रहते गांवों में मुनादी एवं सूचना व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा गश्ती दल की कार्यप्रणाली की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में जन-धन की हानि रोकी जा सके।

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