नवरात्र पर्व को लेकर तैयारियां तेज, बाजारों में उमड़ी रौनक; फल-फूल के दामों में उछाल
पंडालों में साज-सज्जा अंतिम चरण में, मां दुर्गा की आराधना को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह

भालूमाड़ा—। नवरात्र पर्व के प्रारंभ होने के साथ ही नगर में धार्मिक उत्साह और भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। मां दुर्गा की आराधना के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। मंदिरों से लेकर दुर्गा पंडालों तक तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। वहीं, बाजारों में भी खरीदारी की रौनक बढ़ गई है
नवरात्र को लेकर विभिन्न स्थानों पर दुर्गा पंडालों का निर्माण और आकर्षक साज-सज्जा की जा रही है। पंडालों को रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और आकर्षक सजावटी सामग्री से सजाया जा रहा है। आयोजन समितियां पूजा-पाठ, धार्मिक कार्यक्रमों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर तैयारियों में जुटी हुई हैं। श्रद्धालु भी मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं।
बाजारों में बढ़ी चहल-पहल
नवरात्र के चलते बाजारों में पूजन सामग्री, चुनरी, नारियल, अगरबत्ती, दीपक, कलश और अन्य धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ गई है। व्रत रखने वाले लोग फलाहार की सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदारों को पर्व के दौरान कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।
फल-फूल के दाम बढ़ने से श्रद्धालुओं पर असर
नवरात्र के दौरान पूजा-अर्चना में फल और फूलों का विशेष महत्व होता है। मांग बढ़ने के चलते बाजार में फल-फूल के दामों में उछाल देखने को मिल रहा है। इससे पूजा सामग्री और फल खरीदने पहुंचे लोगों के बजट पर असर पड़ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि पर्व के समय आवश्यक पूजन सामग्री उचित कीमत पर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि हर वर्ग के लोग श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर सकें।
नवरात्र में मिट्टी के बर्तनों का विशेष महत्व, परंपरा और आस्था से जुड़ी है पूजा-पद्धति–
नवरात्र पर्व में मिट्टी के बर्तनों का उपयोग धार्मिक आस्था और पारंपरिक पूजा-पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मां दुर्गा की आराधना के दौरान मिट्टी के कलश, दीपक और जवारा बोने के लिए मिट्टी के पात्रों का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। बदलते समय के बावजूद धार्मिक आयोजनों में मिट्टी के बर्तनों की परंपरा आज भी कायम है।
नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के दौरान कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। कई श्रद्धालु पूजा में मिट्टी के कलश और दीपक का उपयोग करते हैं। वहीं, जवारा बोने के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर अनाज बोया जाता है। नौ दिनों तक श्रद्धालु विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और जवारा की सेवा करते हैं।
परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मिट्टी के बर्तन प्राकृतिक सामग्री से बनाए जाते हैं और बिना हानिकारक रसायनों वाले साधारण मिट्टी के पात्र पर्यावरण के अनुकूल विकल्प हो सकते हैं। धार्मिक कार्यों में इनके उपयोग से पारंपरिक कुम्हार समुदाय के रोजगार को भी प्रोत्साहन मिलता है। त्योहारों के दौरान मिट्टी के दीपक, कलश और अन्य पूजा सामग्री की मांग बढ़ने से स्थानीय कारीगरों को आजीविका का अवसर मिलता है।
आस्था और संस्कृति का प्रतीक
नगर पालिका पसान क्षेत्र में भी नवरात्र पर्व के दौरान मिट्टी के बर्तनों का धार्मिक उपयोग परंपरागत पूजा-पद्धति से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालुओं के लिए मिट्टी के पात्र केवल पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़ा प्रतीक हैं। नवरात्र में इनका उपयोग हमारी पारंपरिक विरासत को जीवित रखने का संदेश भी देता है।






































































