कविताओं ने बांधा समां, ठहाकों से गूंजा सांकतोड़िया

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कविताओं ने बांधा समां, ठहाकों से गूंजा सांकतोड़िया

ईसीएल के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में हास्य-व्यंग्य के साथ संवेदना और सामाजिक सरोकारों की दिखी झलक, देर रात तक तालियों की गड़गड़ाहट

 

सांकतोड़िया, 3 सितंबर। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) द्वारा राजभाषा माह का शुभारंभ साहित्य, संस्कृति और काव्य की शानदार महफिल के साथ किया गया। 2 सितंबर को आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सुप्रसिद्ध कवियों ने हास्य, व्यंग्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं की ऐसी प्रस्तुति दी कि सभागार देर रात तक तालियों की गड़गड़ाहट और ठहाकों से गूंजता रहा।

काव्य-संध्या में साहित्य और मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिला। कवियों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं और प्रस्तुति के माध्यम से समसामयिक परिस्थितियों, सामाजिक जीवन और मानवीय संवेदनाओं को अलग-अलग रंगों में प्रस्तुत किया। कहीं हास्य और व्यंग्य ने श्रोताओं को जमकर गुदगुदाया तो कहीं भावपूर्ण कविताओं ने वातावरण को गंभीर और संवेदनशील बना दिया।

कार्यक्रम में ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री सतीश झा मुख्य अतिथि तथा कोल इंडिया लिमिटेड के मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री ब्रजेश कुमार त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा ईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) श्री गुंजन कुमार सिन्हा, निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) श्री गिरीश गोपीनाथ नायर तथा निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री चितरंजन कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही।

शताक्षी महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती किरण झा एवं उपाध्यक्ष श्रीमती अनुभा सिन्हा की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। ईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों तथा उनके परिजनों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने कवि सम्मेलन को और भव्य बना दिया।

हास्य-व्यंग्य की फुहार से खूब गुदगुदाए कवि

कवि सम्मेलन में कानपुर के सुप्रसिद्ध कवि श्री हेमंत पांडेय, एसईसीएल के वरिष्ठ प्रबंधक श्री पाणी पंकज पांडेय, इंदौर की कवयित्री सुश्री भुवन मोहिनी तथा बाराबंकी के कवि श्री गजेंद्र प्रियांशु ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। समसामयिक विषयों और सामाजिक जीवन से जुड़े प्रसंगों को हास्य एवं व्यंग्य के अंदाज में प्रस्तुत करते हुए कवियों ने श्रोताओं को खूब हंसाया और भरपूर वाहवाही बटोरी।

कोल इंडिया लिमिटेड के मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने भी अपनी काव्य प्रस्तुति से कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया। वहीं, ईसीएल के निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री चितरंजन कुमार ने भावपूर्ण कविताओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनकी रचनाओं ने काव्य-संध्या को संवेदना और भावनात्मक गहराई प्रदान की।

साहित्य समाज में संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का माध्यम : सतीश झा

इस अवसर पर ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री सतीश झा ने कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज में संवेदनशीलता, रचनात्मकता तथा सकारात्मक सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वस्थ एवं सार्थक मनोरंजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें साहित्य, कला और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।

उन्होंने राजभाषा के प्रचार-प्रसार और साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजभाषा केवल कार्यालयीन कार्यों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि साहित्य और संस्कृति के माध्यम से इसके प्रति लोगों में रुचि और अपनापन भी विकसित किया जा सकता है।

तालियों और ठहाकों से देर रात तक गूंजता रहा सभागार

कवि सम्मेलन के दौरान माहौल पूरी तरह साहित्यिक उल्लास से सराबोर रहा। हास्य एवं व्यंग्य की प्रस्तुतियों के दौरान सभागार में ठहाके गूंजते रहे, वहीं संवेदनशील एवं भावपूर्ण कविताओं के दौरान श्रोताओं की गंभीरता और भावनात्मक जुड़ाव साफ दिखाई दिया। कवियों की प्रत्येक प्रभावशाली प्रस्तुति पर श्रोताओं ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।

बाहर हल्की बारिश के बीच सजी यह काव्य-संध्या अपने आप में खास रही। बारिश की फुहारों और कविता की रसधार ने आयोजन के वातावरण में आत्मीयता और सौम्यता का अनूठा रंग भर दिया।

राजभाषा माह का यादगार आगाज

कविता, संवेदना, हास्य और उल्लास से सजी यह शाम ईसीएल की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई। राजभाषा माह के शुभारंभ पर आयोजित इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने कर्मचारियों एवं उनके परिजनों को साहित्य और संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि कार्यस्थल पर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां कर्मचारियों के बीच रचनात्मक ऊर्जा, सकारात्मक सोच और आत्मीय जुड़ाव को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ईसीएल का यह काव्य आयोजन केवल राजभाषा माह की शुरुआत नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रभावशाली प्रदर्शन बन गया।

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