करंट की चपेट में आकर झुलसा बंदर, बारिश के बीच वन्यजीव रक्षक ने पहुंचकर बचाई जान

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करंट की चपेट में आकर झुलसा बंदर, बारिश के बीच वन्यजीव रक्षक ने पहुंचकर बचाई जान

धनौली गांव में हादसा, पूंछ और पैर बुरी तरह झुलसे; पशु चिकित्सालय में कराया गया उपचार, वन विभाग रख रहा लगातार नजर

कोतमा। कोतमा वन परिक्षेत्र अंतर्गत चुकान बीट के समीप धनौली गांव में बुधवार को करंट की चपेट में आने से एक बंदर बुरी तरह झुलस गया। हादसे के बाद घायल अवस्था में बंदर को देखकर ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और घायल वन्यजीव को सुरक्षित उपचार दिलाने की कार्रवाई शुरू की गई।

ग्रामीणों ने घटना की जानकारी वन परिक्षेत्र अधिकारी हरीश तिवारी एवं वन्यजीव रक्षक हरिवंश पटेल को दी। सूचना मिलने के बाद वन्यजीव रक्षक हरिवंश पटेल खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश के बीच धनौली गांव पहुंचे। उन्होंने घायल बंदर को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और तत्काल उसे कोतमा पशु चिकित्सालय लाया गया, जहां पशु चिकित्सकों द्वारा उसका उपचार किया गया।

बताया गया कि करंट की चपेट में आने से बंदर की पूंछ और पैर बुरी तरह झुलस गए हैं। बिजली का झटका लगने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। समय पर वन विभाग की टीम के पहुंचने और उपचार मिलने से उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

वन विभाग की टीम ने किया निरीक्षण

घायल बंदर के स्वास्थ्य की स्थिति जानने के लिए गुरुवार को पुराने वन भवन में वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उसका निरीक्षण किया। इस दौरान रेंजर हरीश तिवारी, जेडी धारवे एवं अवधनरेश शुक्ला ने घायल बंदर की चोटों का जायजा लिया और उसके स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों ने बंदर को भोजन भी कराया।

वन विभाग की टीम द्वारा घायल बंदर की लगातार निगरानी और देखभाल की जा रही है। उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में होने वाले सुधार पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग के कर्मचारियों का प्रयास है कि बंदर पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उसे सुरक्षित वातावरण में छोड़ा जाए।

बारिश के बीच वन्यजीव संरक्षण की मिसाल

घटना के बाद वन्यजीव रक्षक द्वारा बारिश के बीच मौके पर पहुंचकर घायल बंदर को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने की कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना हो रही है। ग्रामीणों की सूचना पर तत्काल कार्रवाई होने से घायल वन्यजीव को समय पर उपचार मिल सका। वन विभाग द्वारा वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके संरक्षण को लेकर लगातार निगरानी किए जाने की बात कही गई है।

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