केवई नदी बचाने नदी में उतरे युवा, जल सत्याग्रह से गूंजा चंगेरी

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केवई नदी बचाने नदी में उतरे युवा, जल सत्याग्रह से गूंजा चंगेरी

अवैध रेत खनन, नदी का बहाव रोक सड़क और मिनी बैराज निर्माण के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

कोतमा क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली केवई नदी को बचाने के लिए अब ग्रामीण और युवा खुलकर मैदान में उतर आए हैं। रेत ठेकेदारों द्वारा कथित अवैध खनन, नदी के प्राकृतिक बहाव को रोककर बीच नदी में सड़क निर्माण तथा जगह-जगह मिनी बैराज बनाए जाने के विरोध में बुधवार 13 मई को चंगेरी क्षेत्र में युवाओं और ग्रामीणों ने जोरदार जल सत्याग्रह किया।

रामजी रिंकू मिश्रा एवं देव शरण सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में युवक नदी में उतर गए और घंटों तक कमर तक पानी में खड़े रहकर विरोध प्रदर्शन करते रहे। सुबह से शुरू हुआ यह आंदोलन देर शाम तक जारी रहा। आंदोलन के दौरान युवाओं ने प्रशासन और रेत कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा नदी के अस्तित्व को बचाने की मांग उठाई।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि रेत कंपनी द्वारा भारी मशीनों के माध्यम से नदी का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। नदी के प्राकृतिक बहाव को रोककर बीच धारा में सड़क बना दी गई है, जिससे पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है। इसके अलावा कई स्थानों पर नियम विरुद्ध मिनी बैराज बनाए जा रहे हैं, जिससे नदी के निचले हिस्सों तक पानी पहुंचना लगातार कम होता जा रहा है।

केवई बचाओ समिति से जुड़े युवाओं का कहना है कि केवई नदी केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। इसी नदी के सहारे गांवों की प्यास बुझती है, खेतों की सिंचाई होती है और पशुओं को पानी मिलता है। लेकिन अब नदी को कृत्रिम रूप से बांधकर उसके प्रवाह को रोका जा रहा है, जिससे आने वाले समय में गंभीर जल संकट पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में ही कई गांवों में जलस्तर प्रभावित होने लगा है। नदी के निचले हिस्सों में पानी कम पहुंचने से ग्रामीणों और मवेशियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो पूरा क्षेत्र बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाएगा।

जल सत्याग्रह में शामिल युवाओं ने प्रशासन पर उद्योगपतियों और रेत माफियाओं से मिलीभगत का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि अवैध खनन, नदी में सड़क निर्माण और मिनी बैराज बनाने का कार्य बंद नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई केवल नदी बचाने की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है। जल सत्याग्रह के दौरान क्षेत्र के कई सामाजिक कार्यकर्ता, किसान और ग्रामीण भी आंदोलनकारियों के समर्थन में पहुंचे। पूरे आंदोलन के दौरान नदी किनारे प्रशासनिक हलचल भी बनी रही।

अब क्षेत्रवासियों की नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह केवई नदी को बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करता है या फिर रेत माफियाओं का दबाव भारी पड़ता है।

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