जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में विवाद गहराया: आरएसएस शाखा बंद, बर्खास्तगी व एफआईआर के बाद परिसर में तनाव

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अनूपपुर

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक इन दिनों गंभीर विवादों के केंद्र में आ गया है। विश्वविद्यालय परिसर में पिछले लगभग एक वर्ष से संचालित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखा को हाल ही में बंद करा दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद शाखा से जुड़े कई स्वयंसेवकों और कर्मचारियों को बर्खास्त किए जाने तथा उनके विरुद्ध अमरकंटक थाना में एफआईआर दर्ज होने की खबर सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय में भय और असमंजस का माहौल बताया जा रहा है।

 

सूत्रों के अनुसार शाखा से जुड़े मुख्य शिक्षक, शाखा कार्यवाह, शताब्दी विस्तारक, एबीवीपी से जुड़े पूर्व कार्यकर्ता तथा भारतीय शिक्षण मंडल के एक पदाधिकारी सहित कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन लोगों का आरोप है कि उनके विरुद्ध झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाकर उन्हें निशाना बनाया गया है।

 

बताया जा रहा है कि 15 नवंबर को आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के दौरान भी परिसर में विवाद की स्थिति बनी थी। उस दिन एक ओर जहां कार्यक्रम में राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल, कोल प्राधिकरण के अध्यक्ष रामलाल रौतेल, भाजपा जिला अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित थे, वहीं विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों द्वारा समानांतर कार्यक्रम आयोजित किए जाने के कारण वातावरण तनावपूर्ण हो गया था। इसके बाद प्रशासन ने मामले को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी।

 

इस बीच विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों पर विदेशी संगठनों से कथित फंडिंग और वैचारिक गतिविधियों के संचालन के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन परिसर में इसे लेकर चर्चा तेज है। कुछ छात्रों और शोधार्थियों का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हुआ है।

 

छात्रों ने छात्रावास व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि ओबीसी ट्रांजिट हॉस्टल सहित कुछ छात्रावासों का उपयोग नियमानुसार न होकर अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, जिससे छात्रों को आवास संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

 

दिनांक 19 मार्च 2026 को हुई घटनाओं को लेकर भी विवाद सामने आया है। छात्रों का कहना है कि जब वे अध्ययन के लिए वैकल्पिक आवास की तलाश में छात्रावास पहुंचे तो वहां विवाद की स्थिति बन गई। इसके बाद कुछ शिक्षकों द्वारा प्रशासनिक भवन में विरोध प्रदर्शन किया गया और छात्रों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की गई।

 

छात्रों का आरोप है कि उनके विरुद्ध झूठे आरोप लगाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई। छात्रों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल तथा प्रशासनिक निर्णयों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

 

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन लगातार बढ़ते विवाद ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल, प्रशासनिक पारदर्शिता और छात्र अधिकारों को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

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