जैतहरी तहसील बना कमीशनखोरी का गढ़! चपरासी और कोटवारों के भरोसे चल रहा कामकाज, किसान और आमजन परेशान
अनूपपुर/जैतहरी। जैतहरी तहसील कार्यालय में कथित रूप से व्याप्त भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों का कहना है कि तहसील में बिना पैसे कोई काम नहीं होता, और पैसे न मिलने पर फाइलों को जानबूझकर लंबित रखा जाता है या उलझा दिया जाता है।
लोगों का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल तरीके से बात की जाती है और कार्यालय का अधिकांश काम चपरासी और कोटवारों के भरोसे संचालित हो रहा है। शिकायतों में चपरासी शाहिद खान तथा कोटवार श्याम सुंदर, भगवानदास और देवन के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
ग्रामीणों और फरियादियों का कहना है कि लोकसेवा गारंटी से जुड़े मामलों की फाइलों को रोका जाता है और उन्हें आगे बढ़ाने या फाइल निकलवाने के एवज में मोटी रकम मांगी जाती है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि जिन लोगों द्वारा पैसे नहीं दिए जाते, उनके कार्यों में अनावश्यक आपत्तियां लगाकर देरी की जाती है।
किसानों ने विशेष रूप से पटवारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नामांतरण, सीमांकन, नकल, बंटवारा और अन्य राजस्व संबंधी कार्य समय पर नहीं किए जाते। इससे किसानों को बार-बार तहसील और पटवारी हल्कों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जैतहरी तहसील में आमजन का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है और पूरा तंत्र कथित रूप से कमीशन आधारित व्यवस्था में बदलता जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि कलेक्टर अनूपपुर, संभागीय आयुक्त और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कराएं तथा दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करें।
क्षेत्रवासियों ने यह भी मांग की है कि तहसील कार्यालय में पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए, लोकसेवा गारंटी के प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग हो, और किसानों तथा आम नागरिकों को बिना रिश्वत के समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।






































