बारिश के साथ बढ़ा सर्पदंश का खतरा, एक माह में 50 से अधिक मरीज अस्पताल पहुंचे, पांच की मौत

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कोईलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर : शशिधर अग्रवाल

अनूपपुर। जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही सर्पदंश की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बीते एक माह के दौरान जिला चिकित्सालय अनूपपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैतहरी, कोतमा, पुष्पराजगढ़ तथा विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश के 50 से अधिक पीड़ितों का उपचार किया गया। समय पर अस्पताल पहुंचने और चिकित्सकीय उपचार मिलने से अधिकांश मरीज स्वस्थ हो गए, लेकिन अत्यधिक विषैले करैत (डंडा करायल) सर्प के काटने से तीन पुरुष और दो महिलाओं सहित पांच लोगों की मौत हो गई। बताया गया कि इन मामलों में सर्पदंश शरीर के संवेदनशील अंगों पर हुआ और अस्पताल पहुंचने में देरी भी जानलेवा साबित हुई।

सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिले के वन्यजीव संरक्षक एवं सर्पप्रहरी शशिधर अग्रवाल अपनी टीम के साथ लगातार जनजागरूकता अभियान चला रहे हैं। उनके साथ छोटेलाल यादव, मनोज यादव, धर्मेंद्र यादव और लालदास सिंह ने पिछले दो दिनों में अनूपपुर नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से 20 से अधिक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें वन क्षेत्र में छोड़ दिया। टीम ने लोगों को समझाया कि वर्षा ऋतु में सांप भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में घरों एवं आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं, इसलिए सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है।

जागरूकता अभियान के तहत जिला चिकित्सालय अनूपपुर परिसर स्थित पुलिस चौकी में विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान 9 कोबरा (नाग) सहित रसेल वाइपर, धामन और बैन्डेड कुकरी समेत कुल 12 विभिन्न प्रजातियों के सांपों को सुरक्षित तरीके से दिखाकर चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और आम लोगों को उनकी पहचान, स्वभाव तथा बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में डॉ. आर.के. वर्मा, डॉ. प्रवीण शर्मा, डॉ. प्रवीण भगत, डॉ. एम.डी. औजेर सहित चिकित्सकीय टीम मौजूद रही। चिकित्सकों ने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय पीड़ित को बिना विलंब निकटतम शासकीय अस्पताल पहुंचाना चाहिए, जहां एंटी स्नेक वेनम सहित आवश्यक उपचार उपलब्ध है।

सर्पप्रहरी शशिधर अग्रवाल ने लोगों से अपील की कि घरों के आसपास साफ-सफाई रखें, झाड़ियों को हटाएं, रात में टॉर्च का उपयोग करें तथा किसी भी सांप के दिखाई देने पर उसे मारने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें। उन्होंने कहा कि समय पर उपचार और सही जानकारी ही सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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