बादल छाए तो बिजली गुल, हवा चली तो अंधेरा… जमुना-भालूमाड़ा क्षेत्र में अघोषित कटौती से जनता बेहाल

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बादल छाए तो बिजली गुल, हवा चली तो अंधेरा… जमुना-भालूमाड़ा क्षेत्र में अघोषित कटौती से जनता बेहाल

बिजली संकट से पानी की सप्लाई प्रभावित, दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट

जमुना कोतमा आधुनिक जीवन में बिजली अब केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि दैनिक जरूरत का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। इसके बावजूद पसान नगर पालिका क्षेत्र के जमुना-भालूमाड़ा सहित आसपास के दर्जनों गांवों में वर्षों से चली आ रही अघोषित बिजली कटौती लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि क्षेत्र के लोगों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि बादल छाए तो बिजली बंद, हवा चली तो सप्लाई ठप, बारिश की बूंदें गिरते ही लाइन बंद और तेज गर्मी या उमस बढ़ते ही बिजली गायब हो जाती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या एक-दो दिन या कुछ महीनों की नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी है। हर मौसम में मेंटेनेंस के नाम पर घंटों और कई बार दो से तीन दिनों तक घोषित कटौती की जाती है। इसके अलावा छोटी-छोटी तकनीकी खराबियों के कारण भी पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है, जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

30-35 वर्ष पुरानी लाइन बनी बड़ी समस्या

जानकारों के अनुसार कोतमा उपकेंद्र से भालूमाड़ा तक आने वाली बिजली सप्लाई लाइन करीब तीन दशक पुरानी है। यह लाइन जंगल, खेत, नालों और पेड़ों के बीच से होकर गुजरती है, जिसके कारण तेज हवा, बारिश या प्राकृतिक परिस्थितियों में तार टूटने, जंपर खराब होने और शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याएं लगातार सामने आती रहती हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से इस लाइन के व्यापक सुधार की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

पसान उपकेंद्र बनने के बाद भी नहीं मिली राहत

क्षेत्र में विद्युत समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से लगभग पांच वर्ष पूर्व पसान में विद्युत उपकेंद्र का निर्माण कराया गया था। उस समय लोगों को उम्मीद थी कि बिजली की समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन वर्तमान स्थिति में उपभोक्ताओं को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है। नागरिकों का कहना है कि अधिकांश क्षेत्रों की निर्भरता आज भी पुरानी सप्लाई लाइन पर बनी हुई है, जिसके कारण बिजली संकट लगातार जारी है।

पानी की समस्या ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

अघोषित बिजली कटौती का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं है। क्षेत्र के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति बोरवेल और समरसेबल पंपों पर निर्भर है। बिजली बंद होने से पंप नहीं चल पाते, जिससे लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है। गर्मी और उमस के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

व्यापार और रोजगार पर भी पड़ रहा असर

बिजली आधारित छोटे उद्योग, वेल्डिंग कार्य, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत, कंप्यूटर, फोटोकॉपी एवं अन्य व्यवसायों से जुड़े दुकानदारों का कहना है कि बार-बार होने वाली कटौती से उनका काम प्रभावित हो रहा है। महंगी दरों पर बिजली बिल जमा करने के बावजूद पर्याप्त और नियमित बिजली नहीं मिलने से उनमें नाराजगी है।

शिकायत व्यवस्था और सुधार कार्यों पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली गुल होने की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने और त्वरित समाधान पाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार शिकायत करने के बाद भी समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। लोगों ने विद्युत विभाग से मांग की है कि पुरानी लाइनों के सुधार, नियमित रखरखाव और बेहतर शिकायत निवारण व्यवस्था की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

क्षेत्रवासियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर जैसी योजनाओं के साथ-साथ विद्युत अधोसंरचना के सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग की है कि जमुना-भालूमाड़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की वर्षों पुरानी बिजली समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए, ताकि लोगों को अघोषित कटौती और उससे पैदा होने वाली परेशानियों से राहत मिल सके।

लगातार बढ़ती इस समस्या ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब उपभोक्ता समय पर बिजली बिल जमा कर रहे हैं, तो उन्हें निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली सुविधा कब तक मिल पाएगी। क्षेत्र की जनता अब केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की प्रतीक्षा कर रही है।

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