अवैध बिजली कटौती के खिलाफ शिवसेना का हल्लाबोल, 3 दिन में सुधार नहीं तो बिजली ऑफिस के बाहर धरना

---Advertisement---

अवैध बिजली कटौती के खिलाफ शिवसेना का हल्लाबोल, 3 दिन में सुधार नहीं तो बिजली ऑफिस के बाहर धरना
जमुना-कोतमा क्षेत्र में अंधाधुंध कटौती से जनता त्रस्त, सहायक उपयंत्री को सौंपा ज्ञापन; तकनीकी खामियों पर उठाए गंभीर सवाल

कोतमा। जमुना-कोतमा क्षेत्र में लगातार हो रही अव्यवहारिक और अंधाधुंध बिजली कटौती के विरोध में शिवसेना कोतमा नगर इकाई ने मोर्चा खोल दिया है। शिवसेना शहडोल संभाग अध्यक्ष पवन पटेल के नेतृत्व में नगर प्रमुख बरकत कुरैशी ने कोतमा विद्युत विभाग के सहायक उपयंत्री को ज्ञापन सौंपकर विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि विद्युत विभाग द्वारा बिना ठोस कारण पूरे क्षेत्र की बिजली काट दी जाती है, जिससे आमजन, व्यापारी, छात्र और मरीज भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

शिवसेना नेताओं ने कहा कि बीते दिनों थोड़ी सी आंधी और बारिश के बाद रातभर हर पांच से दस मिनट में बिजली काटी जाती रही। इससे स्पष्ट है कि विभाग की मेंटेनेंस व्यवस्था पूरी तरह विफल है। हफ्तेभर तक भीषण गर्मी में सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक मेंटेनेंस के नाम पर बिजली कटौती की गई। उस दौरान जनता ने यह सोचकर असुविधा सहन की कि भविष्य में निर्बाध बिजली मिलेगी, लेकिन मेंटेनेंस कार्य पूर्ण होने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। अब किसी भी समय बिजली काट दी जाती है और बिजली कब लौटेगी, इसका कोई निश्चित समय नहीं होता।

ज्ञापन में प्रमुख रूप से यह मुद्दा उठाया गया कि किसी एक स्थान पर छोटा सा फॉल्ट आने पर पूरे शहर की बिजली बंद कर दी जाती है। लहसुई, गोविंदा, मुरधवा, दिनेश सिंह के खेत या अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में लाइन पर पेड़ की डाल गिरने, तार टूटने या मामूली फॉल्ट होने पर जमुना, भालूमाड़ा, कोतमा, गोविंदा, 11 नंबर और कदमटोला सहित पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति रोक दी जाती है। शिवसेना ने इसे तकनीकी लापरवाही बताते हुए कहा कि विद्युत व्यवस्था को सेक्शनलाइज कर केवल प्रभावित क्षेत्र की बिजली बंद की जानी चाहिए, न कि पूरे शहर को अंधेरे में डुबो दिया जाए।

शिवसेना ने आरोप लगाया कि विभाग की लापरवाही का सीधा असर आम जनता के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। लगातार बिजली कटौती से व्यापार प्रभावित हो रहा है, पेयजल व्यवस्था चरमरा रही है, विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है और मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने इसे विद्युत अधिनियम 2003 और विद्युत उपभोक्ता अधिकार नियम 2020 का खुला उल्लंघन बताया।

ज्ञापन के माध्यम से शिवसेना ने मांग की कि जिस फीडर या लाइन में फॉल्ट हो, केवल उसी क्षेत्र की बिजली काटी जाए। मुरधवा जंगल एवं खेतों से गुजरने वाली लाइनों की नियमित छंटाई कराई जाए ताकि पेड़-पत्तियों से होने वाले फॉल्ट रोके जा सकें। साथ ही मेंटेनेंस या फॉल्ट की स्थिति में प्रभावित क्षेत्र के उपभोक्ताओं को पूर्व सूचना दी जाए और अन्य क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। संगठन ने यह भी मांग की कि एक छोटे फॉल्ट पर पूरे शहर की बिजली काटने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

शिवसेना नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर विद्युत व्यवस्था में तकनीकी सुधार नहीं किया गया और अव्यवहारिक बिजली कटौती बंद नहीं हुई, तो शिवसेना कोतमा नगर इकाई बिजली विभाग कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगी। ज्ञापन सौंपते समय शिवसेना पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जनता अब अघोषित बिजली संकट और विभागीय लापरवाही को और बर्दाश्त नहीं करेगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

April 28, 2026

April 28, 2026

April 28, 2026

April 27, 2026

April 27, 2026

April 27, 2026

Leave a Comment