अमरकंटक के शंभुधारा में लाखों की लागत से बनीं ध्यान कुटि जर्जर , देखरेख के अभाव में ढह रहीं ,

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अमरकंटक के शंभुधारा में लाखों की लागत से बनीं ध्यान कुटि जर्जर , देखरेख के अभाव में ढह रहीं ,

बनी सात ध्यान कुटि मरम्मत और रखरखाव के लिए बजट नहीं होने की जानकारी

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र धार्मिक नगरी अमरकंटक के शंभुधारा क्षेत्र में वन विभाग द्वारा लाखों रुपये की लागत से निर्मित ध्यान कुटि आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं । जिन सात ध्यान कुटि का निर्माण नर्मदा परिक्रमा वासियों , श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर किया गया था , वे आज देखरेख और मरम्मत के अभाव में ढह रही हैं ।

लाखों खर्च कर बनाया अब रखरखाव की सुध लेने वाला कोई नहीं

जानकारी के अनुसार शंभुधारा क्षेत्र में वन विभाग द्वारा कुल सात ध्यान कुटि का निर्माण कराया गया था । इनका निर्माण शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में कराया गया था । ये कुटि घास-फूस जैसी प्राकृतिक सामग्री से तैयार की गई थीं , ताकि प्रकृति के सान्निध्य में साधना , ध्यान और विश्राम करने वाले लोगों को सुविधा मिल सके । लेकिन समय के साथ इनकी स्थिति बिगड़ती चली गई । लाखों रूपये खर्च कर बनवाया गया था ।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार इन ध्यान कुटि की नियमित देखरेख , रंग-रोगन , मरम्मत और श्रमिकों की व्यवस्था के लिए अलग से बजट उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है । यदि निर्माण के बाद समय-समय पर इनकी मरम्मत और उचित देखभाल की जाती , तो संभवतः इन्हें इस स्थिति तक पहुंचने से बचाया जा सकता था ।

बताया जाता है कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी कई बार यहां क्षेत्र का भ्रमण या निरीक्षण कर चुके हैं । इसके बावजूद ध्यान कुटि की मौजूदा हालत इनके संरक्षण और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है । जब सरकारी राशि खर्च कर किसी सुविधा का निर्माण कराया जाता है , तो उसकी उपयोगिता बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी और आवश्यक मरम्मत भी उतनी ही जरूरी होती है ।

प्राप्त जानकारीनुसार शंभुधारा जैसे प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व वाले क्षेत्र में निर्मित इन ध्यान कुटियों का उद्देश्य श्रद्धालुओं और नर्मदा परिक्रमा वासियों को सुविधा उपलब्ध कराना था । लेकिन वर्तमान स्थिति में यह उद्देश्य प्रभावित होता दिखाई दे रहा है । लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई इन संरचनाओं का इस तरह जर्जर होना सरकारी धन के उपयोग और परिसंपत्तियों के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है ।
अब आवश्यकता है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ध्यान कुटियों की वास्तविक स्थिति का आकलन कराएं , मरम्मत के लिए बजट उपलब्ध कराने की पहल करें और इनके संरक्षण की स्थायी व्यवस्था बनाएं , ताकि इनका लाभ श्रद्धालुओं एवं परिक्रमा वासियों को मिल सके ।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई इन सात ध्यान कुटियों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन है और इनके संरक्षण के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे?

फॉरेस्ट रेंजर अमरकंटक व्ही के श्रीवास्तव का कहना है कि एक बार 17-18 हजार लगाकर मरम्मत कार्य करवाया था , इस वर्ष भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया ।

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