सड़क पर तड़पती गौ माता के लिए देवदूत बने पार्षद पवन चीनी
निजी वाहन से पहुंचाया गौ सेवा आश्रम
जनसेवा के साथ बेजुबान जीवों की सेवा में भी आगे आए पवन कुमार चीनी, धनपुरी में राम दुबे का गौ सेवा अभियान बना बेसहारा गोवंश का सहारा
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अमलाई/धनपुरी। मानवता और संवेदनशीलता की पहचान केवल जरूरतमंद इंसानों की मदद करने से नहीं, बल्कि उन बेजुबान जीवों की पीड़ा समझने से भी होती है, जो अपनी तकलीफ किसी से बयां नहीं कर सकते। इसी सेवा भाव और करुणा की प्रेरणादायक मिसाल नगर परिषद बरगवां-अमलाई के वार्ड क्रमांक 07 के पार्षद एवं समाजसेवी पवन कुमार चीनी ने पेश की। सड़क पर घायल अवस्था में पड़ी गौ माता को देखकर उनका दिल पसीज गया। उन्होंने बिना देर किए अपने निजी वाहन से घायल गौ माता को धनपुरी स्थित गौ सेवा आश्रम पहुंचाया, जहां उसकी देखभाल और उपचार की व्यवस्था की गई।
इंदिरा नगर के पास घायल अवस्था में पड़ी थी गौ माता
जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे अमलाई के इंदिरा नगर के समीप मुख्य मार्ग पर एक गौ माता घायल अवस्था में पड़ी हुई थी। सड़क पर असहाय हालत में पड़ी गौ माता को देखकर पार्षद पवन चीनी तत्काल मदद के लिए आगे आए। उन्होंने परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए समय गंवाने के बजाय घायल पशु को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
पवन चीनी ने अपने निजी वाहन से गौ माता को धनपुरी स्थित गौ सेवा आश्रम पहुंचाया। उनका यह कदम इस बात का उदाहरण है कि सच्ची जनसेवा केवल पद और प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं होती, बल्कि जरूरत के समय किसी असहाय की मदद के लिए आगे आने में दिखाई देती है। सड़क पर घायल पशुओं को देखकर अनदेखा कर देने के बजाय उनकी सहायता करना समाज के प्रत्येक नागरिक की मानवीय जिम्मेदारी है।
जनसेवा के साथ बेजुबानों के प्रति भी संवेदनशील हैं पवन चीनी
पार्षद पवन कुमार चीनी क्षेत्र में जनसेवा और जरूरतमंदों की सहायता के लिए सक्रिय रहते हैं। घायल गौ माता को अपने निजी वाहन से आश्रम पहुंचाने की पहल ने उनके सेवा भाव का एक और पक्ष सामने रखा है। उन्होंने यह संदेश दिया कि बेजुबान जीव भी समाज का हिस्सा हैं और उनकी पीड़ा को समझना तथा संकट के समय उनकी सहायता करना भी सामाजिक जिम्मेदारी है।
उनकी इस पहल से यह प्रेरणा मिलती है कि यदि कोई व्यक्ति घायल पशु को सड़क पर असहाय अवस्था में देखता है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय स्थानीय पशु चिकित्सा सेवा अथवा गौ सेवा संस्था की मदद लेनी चाहिए, ताकि समय रहते उपचार और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा सके।
धनपुरी में राम दुबे का गौ सेवा अभियान, बेसहारा गोवंश की देखभाल में जुटी संस्था
धनपुरी में श्री अटल कामधेनु गौ सेवा संस्थान के अध्यक्ष एवं संस्थापक राम दुबे लंबे समय से बेसहारा, घायल और बीमार गोवंश की सेवा के लिए प्रयासरत हैं। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले तथा बीमार और असहाय अवस्था में मिलने वाले गोवंश को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के साथ उनकी देखभाल, चारे-पानी और उपचार की व्यवस्था करना गौ सेवा के महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल है।
राम दुबे के नेतृत्व में संस्थान बेसहारा गोवंश को सहारा देने का प्रयास कर रहा है। घायल और बीमार पशुओं की सेवा करना आसान कार्य नहीं है। इसके लिए समय, संसाधन, मेहनत और निरंतर समर्पण की आवश्यकता होती है। ऐसे में गौ सेवा के लिए आगे आने वाले लोगों और संस्थाओं का सहयोग बेजुबान जीवों के लिए महत्वपूर्ण साबित होता है।
पवन चीनी की तत्परता और राम दुबे की सेवा भावना बनी मिसाल
घायल गौ माता को सड़क से उठाकर सुरक्षित आश्रय तक पहुंचाने में पवन कुमार चीनी की तत्परता और गौ सेवा आश्रम में उसकी देखभाल की व्यवस्था, सेवा के दो महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाती है। संकट के समय घायल पशु को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसके उपचार और देखभाल की व्यवस्था करना भी है।
पवन चीनी की पहल और राम दुबे के नेतृत्व में गौ सेवा संस्थान के प्रयास समाज को यह संदेश देते हैं कि सामूहिक संवेदनशीलता से बेजुबान जीवों की मदद की जा सकती है। जब जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गौ सेवक मिलकर आगे आते हैं, तो घायल और बेसहारा गोवंश को नया सहारा मिल सकता है।
गौ सेवा केवल भावना नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी भी
यह घटना समाज के सामने एक महत्वपूर्ण संदेश रखती है कि इंसानियत की असली पहचान उसके कार्यों से होती है। सड़क पर घायल पशु को देखकर उसकी अनदेखी करने के बजाय मदद के लिए आगे आना संवेदनशील समाज की पहचान है।
पार्षद पवन कुमार चीनी द्वारा घायल गौ माता को निजी वाहन से धनपुरी स्थित गौ सेवा आश्रम पहुंचाना और राम दुबे के नेतृत्व में संस्थान द्वारा गौ सेवा के लिए किए जा रहे प्रयास इस बात की प्रेरणा देते हैं कि सेवा का भाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए।
गौ माता बोल नहीं सकतीं, लेकिन उनकी पीड़ा को समझना और संकट के समय उनकी मदद करना ही सच्ची संवेदनशीलता है। जरूरत इस बात की है कि समाज का हर व्यक्ति घायल और बेसहारा पशुओं के प्रति जिम्मेदारी निभाए तथा उन्हें सुरक्षित स्थान और समय पर उपचार दिलाने में सहयोग करे।







































































