- पराली प्रबंधन से बढ़ेगी खेतों की उपजाऊ क्षमता, कृषि यंत्रों पर मिल रहा अनुदान
अनूपपुर 15 अक्टूबर 2026/ किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा किसानों को फसल अवशेष (पराली) नहीं जलाने तथा उसका उचित प्रबंधन करने की सलाह दी गई है। विभाग ने बताया है कि पराली का उपयोग पशुओं के चारे एवं जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है तथा खेतों में मौजूद मित्र कीटों को नुकसान पहुंचने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है।
फसल अवशेषों को खेत में मिलाने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। हैप्पी सीडर, सुपर सीडर एवं वेस्ट डी-कम्पोजर की सहायता से पराली को जैविक खाद में परिवर्तित किया जा सकता है। इससे मिट्टी में जैविक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने, आगामी फसल की पैदावार में सुधार करने तथा खाद पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है।
पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान
विभाग द्वारा पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए रीपर, रीपर कम्बाइनर, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ रीपर एवं रोटावेटर सहित विभिन्न कृषि यंत्रों पर अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इन कृषि यंत्रों की सहायता से किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर सकते हैं।
उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला अनूपपुर ने किसानों से अपील की है कि वे पराली जलाने के बजाय उसका उपयोग खेतों में जैविक खाद बनाने एवं मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए करें। पराली का उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण, वायु प्रदूषण में कमी तथा कृषि भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होगा।







































































