बच्चों को जंगल, वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण की दी जानकारी

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  • वन्यजीव प्राणी सुरक्षा सप्ताह के तहत विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम,

जैतहरी। वन्यजीव प्राणी सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत 1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक वन विभाग द्वारा विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा ग्राम पंचायत पड़रिया के ग्राम चोई स्थित विद्यालयों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं को जंगल, वन्यजीवों, पेड़-पौधों एवं पर्यावरण संरक्षण के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान जैतहरी रेंजर विवेक मिश्रा एवं वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने बच्चों को समझाया कि जंगल हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जंगलों से हमें स्वच्छ हवा, जल, औषधीय पौधे और अनेक प्रकार के प्राकृतिक संसाधन प्राप्त होते हैं। साथ ही जंगल असंख्य वन्यजीवों, पक्षियों और छोटे-बड़े जीव-जंतुओं का प्राकृतिक घर भी हैं। इसलिए जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा करना केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

बच्चों को हाथियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि हाथी जंगल के महत्वपूर्ण वन्यजीवों में शामिल हैं और जंगल के प्राकृतिक पर्यावरण को बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी प्रकार शेर, बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण, जंगली सूअर, नीलगाय, बंदर सहित अनेक वन्यजीव जंगल की जैव विविधता का हिस्सा हैं। प्रत्येक जीव प्रकृति के संतुलन में अपनी भूमिका निभाता है। किसी एक प्रजाति के कम होने या समाप्त होने से पूरे प्राकृतिक तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है।

वन विभाग द्वारा बच्चों को यह भी बताया गया कि जंगलों में रहने वाले भालू और अन्य वन्यजीवों से ग्रामीणों को सावधानी बरतनी चाहिए। वन्यजीव यदि अपने प्राकृतिक क्षेत्र में दिखाई दें तो उन्हें परेशान या नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। वन्यजीवों के साथ छेड़छाड़ करना उनके लिए भी खतरा पैदा करता है और मनुष्यों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसी स्थिति में वन विभाग को तत्काल सूचना देना सबसे उचित कदम है।

कार्यक्रम में पेड़-पौधों के महत्व पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। बच्चों को बताया गया कि एक पेड़ केवल लकड़ी का स्रोत नहीं है, बल्कि वह पक्षियों को आश्रय, जीव-जंतुओं को भोजन और मनुष्य को ऑक्सीजन प्रदान करता है। बरगद, पीपल, नीम, महुआ, साल, सागौन सहित विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे जंगलों की सुंदरता और जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिक से अधिक पेड़ लगाने के साथ-साथ पुराने पेड़ों की रक्षा करना भी आवश्यक है।

वन विभाग के कर्मचारियों ने बच्चों को पहाड़ों, नदी-नालों और जलस्रोतों के महत्व के बारे में भी जानकारी दी। बताया गया कि पहाड़ और जंगल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में मौजूद वन क्षेत्र वर्षा के पानी को रोकने और जमीन में पानी पहुंचाने में मदद करते हैं। जंगल और पेड़-पौधे नदी, नालों एवं अन्य जलस्रोतों को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि जंगलों की लगातार कटाई होती रही तो इसका सीधा प्रभाव जलस्रोतों और पर्यावरण पर पड़ सकता है।

बच्चों को जंगलों में आग लगने से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया गया। वनाग्नि से पेड़-पौधों के साथ-साथ छोटे जीव-जंतु, पक्षी और अन्य वन्यजीव प्रभावित होते हैं। जंगल में आग लगने की स्थिति में ग्रामीणों एवं आम नागरिकों को तत्काल वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। इसी प्रकार अवैध रूप से पेड़ों की कटाई, वन्यजीवों का शिकार और जंगल में कचरा फेंकने जैसी गतिविधियों से भी बचना चाहिए।
वन विभाग के अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे स्वयं प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करें। बच्चों को यह संदेश दिया गया कि जंगल बचेंगे तो वन्यजीव बचेंगे, वन्यजीव बचेंगे तो प्रकृति का संतुलन बना रहेगा और प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा।

इस अवसर पर जैतहरी रेंजर विवेक मिश्रा, डिप्टी रेंजर संतोष श्रीवास्तव, बीट गार्ड रमेश सिंह एवं डिप्टी रेंजर कोमल सिंह सहित ग्राम पंचायत पड़रिया के सरपंच भूपेंद्र सिंह एवं रामप्रसाद चौधरी तथा विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
वन्यजीव प्राणी सुरक्षा सप्ताह के माध्यम से आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को प्रकृति, जंगल, पेड़-पौधों, पहाड़ों, नदियों और वन्यजीवों के महत्व से परिचित कराना तथा उनमें पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित प्राकृतिक संपदा छोड़ने के लिए आज से ही जंगल और वन्यजीवों की रक्षा करना जरूरी है।

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