हिंदी को ज्ञान-विज्ञान और जन-जन की भाषा बनाने का आह्वान

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हिंदी को ज्ञान-विज्ञान और जन-जन की भाषा बनाने का आह्वान

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में हिंदी माह-2026 का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह, प्रतियोगिताओं के विजेताओं को किया गया सम्मानित

अमरकंटक। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में राजभाषा प्रकोष्ठ एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदी माह-2026 का समापन समारोह एवं पुरस्कार वितरण कार्यक्रम गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विज्ञान विभाग के प्राध्यापक प्रो. आलोक श्रोत्रिय ने की। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, शोधार्थी, विद्यार्थी, कर्मचारी तथा केंद्रीय विद्यालय एवं मॉडल ट्राइबल स्कूल के शिक्षक-छात्र उपस्थित रहे।

समारोह के प्रारंभ में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र कुमार सिंह ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने हिंदी माह के आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले आयोजकों, समन्वयकों, संयोजकों, निर्णायकों, प्रतियोगिताओं के विजेताओं एवं प्रतिभागियों सहित उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया। उन्होंने हिंदी के व्यापक प्रयोग तथा विश्वविद्यालयीन गतिविधियों में राजभाषा के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।

इसके बाद राजभाषा प्रकोष्ठ की हिंदी अधिकारी एवं हिंदी माह-2026 की समन्वयक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने हिंदी माह के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं एवं परिचर्चाओं का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि हिंदी माह के दौरान प्रतिभागियों को हिंदी के प्रति रचनात्मक अभिरुचि विकसित करने तथा राजभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। उन्होंने इन आयोजनों को सफल बनाने में प्रतियोगिता संयोजकों, निर्णायकों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

हिंदी को ज्ञान-विज्ञान की भाषा बनाने पर जोर

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. आलोक श्रोत्रिय ने हिंदी माह-2026 के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने हिंदी को जन-गण, जन-जन और जन-मन की भाषा बताते हुए इसके व्यापक स्वरूप पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के बीच सेतु का कार्य करने वाली भाषा है। उन्होंने हिंदी को सेतु भाषा के साथ अंतरराष्ट्रीय भाषा तथा ज्ञान-विज्ञान की भाषा के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो. श्रोत्रिय ने हिंदी टंकण को सरल और सुगम बनाने के लिए ऑनलाइन उपलब्ध विभिन्न माध्यमों एवं संसाधनों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने मंत्रालय, सचिवालय और प्रशासनिक स्तर पर राजभाषा के प्रभावी कार्यान्वयन से जुड़ी आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी-कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों से हिंदी में अधिकाधिक सामग्री तैयार करने तथा उसका डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रसार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में हिंदी के विकास के लिए केवल कार्यालयीन कार्यों तक सीमित रहने के बजाय शिक्षा, शोध, तकनीक और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्रों में हिंदी सामग्री का निरंतर निर्माण आवश्यक है।

विजेताओं एवं प्रतिभागियों का सम्मान

समारोह के दौरान हिंदी माह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रशस्ति प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के उत्साहवर्धन के साथ आयोजन से जुड़े संयोजकों, निर्णायकों और सहयोगियों के योगदान को भी रेखांकित किया गया।

समापन अवसर पर हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रवीण कुमार ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेन्द्र प्रताप ने किया।

समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक विभागों के संकाय सदस्यों, शोध अध्येताओं एवं विद्यार्थियों के अलावा कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारियों, एनसीसी एवं एनएसएस कैडेटों तथा केंद्रीय विद्यालय और मॉडल ट्राइबल स्कूल के शिक्षक-छात्रों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम ने हिंदी के प्रयोग, प्रसार और डिजिटल माध्यमों में इसके व्यापक उपयोग को लेकर सकारात्मक संदेश दिया।

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