अनूपपुर 29 सितंबर 2026- सपने बड़े हों तो रास्ते भी निकल आते हैं। जरूरत होती है केवल अवसर, मार्गदर्शन और उन्हें पूरा करने के दृढ़ संकल्प की। अनूपपुर विकासखंड के सीमावर्ती ग्राम आमाडाण्ड की श्रीमती सुमीना पाव ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर इसी विश्वास को अपने जीवन में साकार किया है। कभी सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करने वाली सुमीना आज सफल उद्यमी, पूर्व सरपंच और ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। वर्ष 2013 में गांव में आयोजित रात्रिकालीन सभा ने सुमीना के जीवन को नई दिशा दी। आजीविका मिशन की गतिविधियों और स्व-सहायता समूहों के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने 26 अप्रैल 2013 को ‘ज्योति स्व-सहायता समूह’ की सदस्यता ली और सचिव की जिम्मेदारी संभाली। नियमित बचत और समूह से मिले मार्गदर्शन ने उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा किया और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का रास्ता खोला।
सुमीना ने सामुदायिक निवेश निधि से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर गांव में किराना दुकान प्रारंभ की। इसके बाद 50 हजार रुपये का आजीविका ऋण लेकर सौंदर्य सेवा केंद्र के कार्य का विस्तार किया। आगे बढ़ने की चाह ने उन्हें नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया। बैंक से ऋण सुविधा प्राप्त कर चार चरणों में कुल 2 लाख 50 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने पति के सहयोग से ईंट भट्ठा व्यवसाय भी प्रारंभ किया।
मेहनत और योजनाबद्ध तरीके से किए गए इन प्रयासों का परिणाम उनकी बढ़ती आय के रूप में सामने आया। कभी 4 हजार रुपये मासिक व्यक्तिगत आय अर्जित करने वाली सुमीना की आय आज 16 हजार 500 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई है। परिवार की संयुक्त मासिक आय 25 हजार 500 रुपये हो गई है। लगभग 2 लाख रुपये की वार्षिक पारिवारिक आय के साथ वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी उन्हें मिला है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सुमीना ने सामाजिक जिम्मेदारी को भी अपना उद्देश्य बनाया। वर्ष 2015 में ग्राम पंचायत सरपंच निर्वाचित होकर उन्होंने गांव के विकास में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वच्छता, शौचालय निर्माण, बाल विवाह की रोकथाम, बेटियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने तथा विद्यालय और आंगनबाड़ियों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए उन्होंने ग्रामीणों को निरंतर प्रेरित किया।
आज सुमीना स्वयं तक सीमित नहीं हैं। ‘अम्बे ग्राम संगठन’ और ‘संकल्प संकुल स्तरीय संगठन आमाडाण्ड’ के माध्यम से वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। उनकी यात्रा बताती है कि स्व-सहायता समूह में की गई छोटी-सी बचत भी जब आत्मविश्वास, मेहनत और सही मार्गदर्शन से जुड़ती है, तो वह परिवार की आर्थिक तस्वीर बदलने के साथ समाज में नेतृत्व की नई राह खोल सकती है।


































































