खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वेकोलि सीएमडी डॉ. हेमंत पांडे को ‘एमिनेंट इंजीनियर अवॉर्ड’
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया सम्मानित, नागपुर में आयोजित 36वें राष्ट्रीय खनन अभियंता सम्मेलन में देश के बदलते खनन परिदृश्य पर हुआ मंथन
नागपुर। द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के नागपुर लोकल सेंटर की ओर से होटल रेडिसन ब्लू, वर्धा रोड, नागपुर में आयोजित दो दिवसीय 36वें राष्ट्रीय खनन अभियंता सम्मेलन का शुभारंभ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री श्री आशीष जायसवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। सम्मेलन में खनन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, अभियंताओं एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने देश में खनन के भविष्य, नई तकनीकों, पर्यावरण संरक्षण और महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती भूमिका पर विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) के सीएमडी डॉ. हेमंत शरद पांडे को खनन इंजीनियरिंग एवं खनन उद्योग के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘एमिनेंट इंजीनियर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके नेतृत्व, तकनीकी योगदान तथा खनन क्षेत्र को नई दिशा देने वाले प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।
विदर्भ में 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य
उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विदर्भ की विशाल खनिज संपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से गढ़चिरौली के आयरन ओर भंडारों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री के अनुसार क्षेत्र में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश और करीब 50 एमटीपीए इस्पात उत्पादन क्षमता विकसित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि नई राष्ट्रीय मिशन के तहत देश में स्थापित की जा रही शुरुआती आठ कोयला गैसीकरण परियोजनाओं में से चार परियोजनाएं विदर्भ को प्राप्त हुई हैं। इससे क्षेत्र में कोयला आधारित उद्योगों के साथ-साथ मूल्यवर्धित उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
‘नागपुर को देश की खनन राजधानी बनाया जाए’
वेकोलि के सीएमडी डॉ. हेमंत शरद पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि नागपुर को देश की खनन राजधानी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी व्यापक सोच के साथ राष्ट्रीय खनन अभियंता सम्मेलन का आयोजन किया गया है, ताकि खनन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर आकर भविष्य की संभावनाओं, चुनौतियों और तकनीकी बदलावों पर विचार कर सकें।
डॉ. पांडे ने बताया कि वेकोलि ने अपनी 12 खदानों में 18 महत्वपूर्ण खनिजों एवं रेयर अर्थ एलिमेंट्स की पहचान की है। उन्होंने कहा कि कंपनी अब केवल कोयला उत्पादन तक सीमित न रहकर महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण और शुद्धीकरण जैसे नए क्षेत्रों में भी विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने विदर्भ को केवल संसाधन-संपन्न क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि मूल्यवर्धित और उच्च आय वाले संसाधन केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कोयला गैसीकरण से लेकर स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट तक
डॉ. पांडे ने माजरी में प्रस्तावित कोयला गैसीकरण हब की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने मेक इन इंडिया, पीएलआई, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी राष्ट्रीय पहलों के साथ खनन क्षेत्र को जोड़ने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि खनन क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, कौशल विकास और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को गति दी जा सकती है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को खनन उद्योग का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि वेकोलि जल संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता और इको-टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में भी कार्य कर रही है।
जिम्मेदार खनन और आधुनिक तकनीक पर जोर
उद्घाटन सत्र के बाद प्रतिष्ठित प्रोफेसर एस.के. बोस मेमोरियल लेक्चर वेकोलि के सीएमडी डॉ. हेमंत पांडे ने प्रस्तुत किया। उन्होंने जिम्मेदार खनन, पर्यावरण संरक्षण, नवीनतम तकनीकों के समावेश और खनन अपशिष्ट को अवसरों में बदलने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार रखे।
उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों एवं रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसी नई वर्टिकल्स, कोयला गैसीकरण, खनन के बाद भूमि के पुनर्प्रयोजन तथा वाणिज्यिक बांस रोपण की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में खनन क्षेत्र का स्वरूप तेजी से बदलने वाला है और उद्योग को नई तकनीक तथा पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ना होगा।
2047 के विकसित भारत में AI और रोबोटिक्स की भूमिका
डॉ. पांडे ने विकसित भारत 2047 के संदर्भ में भविष्य के खनन परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में खनन क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग महत्वपूर्ण होगा। इन तकनीकों के माध्यम से खदानों की सुरक्षा, उत्पादन क्षमता, संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरणीय निगरानी को मजबूत किया जा सकता है।
वेकोलि की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की प्रस्तुति
कार्यक्रम के अगले सत्र में वेकोलि के निदेशक (मानव संसाधन/वित्त) श्री बिक्रम घोष ने कंपनी पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने वेकोलि के इतिहास, प्रमुख पहलों, उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं और राष्ट्र के विकास में कंपनी के योगदान की जानकारी दी।
इसके बाद सम्मेलन में तकनीकी शोधपत्रों की प्रस्तुति का सिलसिला शुरू हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान खनन इंजीनियरिंग एवं संबंधित विषयों पर कुल 34 शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। सम्मेलन में खनन क्षेत्र के वर्तमान मुद्दों के साथ भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं, पर्यावरणीय स्थिरता और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेषज्ञों के बीच व्यापक चर्चा हो रही है।
कुल मिलाकर 36वें राष्ट्रीय खनन अभियंता सम्मेलन ने विदर्भ की खनिज क्षमता, वेकोलि के बदलते स्वरूप और भविष्य के तकनीक-आधारित एवं पर्यावरण-सम्मत खनन की दिशा में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श का मंच प्रदान किया।


































































